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Study Notes

Mid-Day Meal Scheme Rules and History for UPTET Exam 2026

Mid-Day Meal Scheme (PM POSHAN): History, Rules & Significance for UPTET 2026 | मध्याह्न भोजन योजना (पीएम पोषण): इतिहास, नियम और UPTET 2026 के लिए महत्व

Practice Questions
Author

Unictest Team

Updated: 2026-04-20 · English

Mid-Day Meal Scheme Rules and History for UPTET Exam 2026

सरकारी योजनाओं (Government Schemes) से संबंधित प्रश्न विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (Teacher Eligibility Tests) जैसे UPTET में एक महत्वपूर्ण खंड होते हैं। इसी कड़ी में, भारत सरकार की सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक, मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal Scheme - MDMS) और अब प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) योजना, की विस्तृत जानकारी UPTET 2026 के उम्मीदवारों के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह योजना न केवल बच्चों के पोषण और शिक्षा को बढ़ावा देती है, बल्कि सामाजिक समानता स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


मध्याह्न भोजन योजना (MDMS) का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य | Historical Perspective of MDMS

भारत में स्कूल जाने वाले बच्चों के बीच भूख और कुपोषण की समस्या को दूर करने के लिए मध्याह्न भोजन योजना की शुरुआत की गई थी। इसका इतिहास काफी पुराना है, लेकिन इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने में कई दशक लगे।

  • प्रारंभिक पहल (Early Initiatives): भारत में सबसे पहले 1925 में मद्रास नगर निगम (Madras Municipal Corporation) द्वारा बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने की पहल की गई थी। इसके बाद, कई अन्य राज्यों, जैसे गुजरात, केरल और तमिलनाडु ने भी अपने स्तर पर ऐसे कार्यक्रम शुरू किए।
  • राष्ट्रीय कार्यक्रम का उदय (Emergence of National Programme): 15 अगस्त 1995 को, केंद्र सरकार ने 'प्राथमिक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पोषण सहायता कार्यक्रम' (National Programme of Nutritional Support to Primary Education - NP-NSPE) के रूप में मध्याह्न भोजन योजना की शुरुआत की। इसका उद्देश्य सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और स्थानीय निकाय स्कूलों में कक्षा I से V तक के बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना था।
  • सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप (Supreme Court Intervention): 2001 में, सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों को अपने स्कूलों में पका हुआ मध्याह्न भोजन प्रदान करने का निर्देश दिया, जिससे इस योजना को और गति मिली।
  • विस्तार और नाम परिवर्तन (Expansion and Renaming): 2004 में, योजना को 'मध्याह्न भोजन योजना' (Mid-Day Meal Scheme) नाम दिया गया और इसमें पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया। 2007 में, इसे उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा VI-VIII) तक भी विस्तारित किया गया, जिससे इसका कवरेज बढ़ गया।
  • PM POSHAN योजना (2021): सितंबर 2021 में, केंद्र सरकार ने मध्याह्न भोजन योजना का नाम बदलकर 'प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण' (PM POSHAN) योजना कर दिया। इस योजना का उद्देश्य सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा VIII तक के बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन प्रदान करना है, जिसमें पोषण वाटिका (Nutri-gardens) और पूरक पोषण (Supplementary Nutrition) जैसे नए घटक भी शामिल किए गए हैं।
ध्यान दें: UPTET परीक्षा के लिए, MDMS के ऐतिहासिक विकास, इसके उद्देश्यों और वर्तमान में इसे किस नाम से जाना जाता है, यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है। PM POSHAN योजना के नए प्रावधानों पर विशेष ध्यान दें।

मध्याह्न भोजन योजना (PM POSHAN) के प्रमुख उद्देश्य | Key Objectives of MDMS (PM POSHAN)

यह योजना कई महत्वपूर्ण उद्देश्यों को पूरा करती है, जो शिक्षा और बाल विकास दोनों से संबंधित हैं:

  • नामांकन और उपस्थिति में वृद्धि (Increase in Enrollment and Attendance): स्कूल में एक गर्म और पौष्टिक भोजन मिलने की गारंटी बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करती है, जिससे नामांकन दर और दैनिक उपस्थिति में सुधार होता है।
  • बच्चों के पोषण स्तर में सुधार (Improvement in Nutritional Status): यह योजना बच्चों को आवश्यक कैलोरी और प्रोटीन प्रदान करके कुपोषण की समस्या को कम करने में मदद करती है, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
  • ड्रॉपआउट दर में कमी (Reduction in Dropout Rate): भोजन के लालच से बच्चे स्कूल छोड़ते नहीं हैं और अपनी पढ़ाई पूरी करने की संभावना बढ़ जाती है।
  • शैक्षिक प्रदर्शन में सुधार (Improvement in Learning Outcomes): कुपोषण से मुक्त और ऊर्जावान बच्चे पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं।
  • सामाजिक समानता को बढ़ावा (Promote Social Equity): यह योजना सभी बच्चों को, चाहे वे किसी भी सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि से हों, एक साथ भोजन करने का अवसर प्रदान करती है, जिससे जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव कम होता है।
  • महिलाओं को सशक्त बनाना (Empowerment of Women): भोजन तैयार करने और वितरित करने में स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर मिलते हैं।

Important Topics Data

वर्ष/अवधिप्रमुख घटना/योजना का नाममुख्य विशेषताएं
1925मद्रास नगर निगम की पहलभारत में बच्चों को मध्याह्न भोजन प्रदान करने की पहली ज्ञात पहल।
15 अगस्त 1995प्राथमिक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पोषण सहायता कार्यक्रम (NP-NSPE)केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में MDMS की शुरुआत (कक्षा I-V के लिए)।
2001सर्वोच्च न्यायालय का निर्देशसभी राज्यों को सरकारी स्कूलों में पका हुआ मध्याह्न भोजन प्रदान करने का निर्देश।
2004मध्याह्न भोजन योजना (MDMS)योजना का नाम बदला, पका हुआ भोजन प्रदान करना अनिवार्य किया गया।
2007योजना का विस्तारउच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा VI-VIII) के बच्चों को भी शामिल किया गया।
सितंबर 2021प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) योजनाMDMS का नया नाम, प्री-प्राइमरी से कक्षा VIII तक कवरेज, पोषण वाटिका जैसे नए घटक।

Detailed Notes

प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM POSHAN) योजना के नियम और दिशानिर्देश | Rules and Guidelines of PM POSHAN Scheme

PM POSHAN योजना, जो कि MDMS का ही एक नया रूप है, कुछ विशिष्ट नियमों और दिशानिर्देशों के तहत संचालित होती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भोजन की गुणवत्ता, सुरक्षा और पोषण मूल्य बनाए रखा जाए। UPTET aspirants को इन नियमों की गहन समझ होनी चाहिए।


1. पोषण संबंधी मानक (Nutritional Norms):

योजना के तहत प्रदान किए जाने वाले भोजन के लिए विशिष्ट पोषण मानक निर्धारित किए गए हैं:

  • प्राथमिक स्तर (Primary Level - Class I-V):
    - कैलोरी: न्यूनतम 450 कैलोरी
    - प्रोटीन: न्यूनतम 12 ग्राम
    - सूक्ष्म पोषक तत्व: आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन ए जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर।
  • उच्च प्राथमिक स्तर (Upper Primary Level - Class VI-VIII):
    - कैलोरी: न्यूनतम 700 कैलोरी
    - प्रोटीन: न्यूनतम 20 ग्राम
    - सूक्ष्म पोषक तत्व: आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन ए जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर।

2. गुणवत्ता नियंत्रण और स्वच्छता (Quality Control and Hygiene):

  • खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता (Food Safety and Hygiene): भोजन तैयार करने और परोसने में उच्च स्तर की स्वच्छता बनाए रखना अनिवार्य है। इसमें खाना पकाने के बर्तनों की सफाई, सुरक्षित पेयजल का उपयोग और व्यक्तिगत स्वच्छता शामिल है।
  • सामग्री की गुणवत्ता (Quality of Ingredients): योजना के तहत उपयोग की जाने वाली सभी खाद्य सामग्री (अनाज, दालें, सब्जियां, तेल आदि) उच्च गुणवत्ता वाली और FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
  • जांच और परीक्षण (Testing and Inspection): भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाती है। राज्य सरकारें और स्थानीय निकाय खाद्य प्रयोगशालाओं के माध्यम से भोजन के नमूने एकत्र कर उनका परीक्षण करवाते हैं।

3. कार्यान्वयन और निगरानी (Implementation and Monitoring):

  • केंद्र और राज्य की भागीदारी (Centre-State Partnership): योजना का वित्तपोषण केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा साझा किया जाता है (उदाहरण के लिए, सामान्य राज्यों के लिए 60:40, पूर्वोत्तर राज्यों और पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10)।
  • स्कूल प्रबंधन समिति (School Management Committee - SMC): SMCs की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वे भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और वितरण की निगरानी करते हैं।
  • स्थानीय निकायों की भूमिका (Role of Local Bodies): पंचायती राज संस्थाएं और शहरी स्थानीय निकाय योजना के प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता करते हैं।
  • सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit): पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) का प्रावधान है, जिसमें समुदाय के सदस्य योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा करते हैं।
  • डिजिटल निगरानी (Digital Monitoring): कई राज्यों में योजना की प्रभावी निगरानी के लिए मोबाइल ऐप और वेब-पोर्टल का उपयोग किया जाता है।
UPTET के लिए तथ्य: PM POSHAN योजना के तहत पोषण वाटिका (Nutri-gardens) विकसित करने पर जोर दिया गया है, ताकि स्कूलों में ताजी सब्जियां उपलब्ध हो सकें। यह योजना 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को भी बढ़ावा देती है।

Important Questions & Tips

UPTET परीक्षा के लिए मध्याह्न भोजन योजना की तैयारी | Preparing MDMS for UPTET Exam

UPTET परीक्षा में, शिक्षा से संबंधित सरकारी योजनाओं से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। मध्याह्न भोजन योजना (अब PM POSHAN) इस संदर्भ में एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। आपको इस योजना के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझना होगा।


महत्वपूर्ण बिंदु जिन पर ध्यान दें:

  • योजना का नाम और वर्ष: MDMS कब शुरू हुई? PM POSHAN में इसका नाम कब बदला गया?
  • उद्देश्य: योजना के मुख्य लक्ष्य क्या हैं (नामांकन, पोषण, ड्रॉपआउट कमी)?
  • पोषण मानक: प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के लिए कैलोरी और प्रोटीन की मात्रा याद रखें।
  • कवरेज: यह किन कक्षाओं और किन स्कूलों को कवर करती है? (प्री-प्राइमरी से कक्षा VIII तक, सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल)।
  • वित्तपोषण पैटर्न: केंद्र और राज्य के बीच लागत साझाकरण अनुपात क्या है?
  • नवीनतम अपडेट: PM POSHAN योजना के तहत जोड़े गए नए घटक क्या हैं (जैसे पोषण वाटिका, पूरक पोषण)?
  • संबंधित मंत्रालय: यह योजना किस केंद्रीय मंत्रालय के तहत आती है? (शिक्षा मंत्रालय)।

UPTET में संभावित प्रश्न प्रकार:

आपसे बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) पूछे जा सकते हैं जैसे:

  • मध्याह्न भोजन योजना किस वर्ष शुरू की गई थी?
  • PM POSHAN योजना का पूर्ण रूप क्या है?
  • प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन में न्यूनतम कितनी कैलोरी होनी चाहिए?
  • मध्याह्न भोजन योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
परीक्षा टिप: सरकारी योजनाओं से संबंधित तथ्यों और आंकड़ों को याद रखने के लिए नोट्स बनाएं और नियमित रूप से दोहराएं। Unictest पर उपलब्ध मॉक टेस्ट और क्विज़ का अभ्यास करके अपनी तैयारी का मूल्यांकन करें।

इस प्रकार, मध्याह्न भोजन योजना (अब PM POSHAN) को UPTET परीक्षा के सामान्य ज्ञान और बाल विकास एवं शिक्षणशास्त्र खंड दोनों के लिए अच्छी तरह से तैयार करना महत्वपूर्ण है। यह न केवल आपके स्कोर में सुधार करेगा बल्कि एक भावी शिक्षक के रूप में आपको शिक्षा प्रणाली की महत्वपूर्ण पहलों की गहरी समझ भी प्रदान करेगा।

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Frequently Asked Questions (UPTET)

मध्याह्न भोजन योजना (MDMS), जिसे अब PM POSHAN योजना के नाम से जाना जाता है, भारत सरकार द्वारा संचालित एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना, नामांकन और उपस्थिति बढ़ाना, तथा ड्रॉपआउट दर को कम करना है। यह बच्चों को स्कूल में गर्म, पका हुआ पौष्टिक भोजन प्रदान करती है।

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