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Mock Tests 2026

Super TET Science: Metallurgy और Extraction of Metals (धातु कर्म और धातुओं का निष्कर्षण) - Mock Test 2026

Super TET Science में Metallurgy और Extraction of Metals के महत्वपूर्ण प्रश्न - आपकी सफलता की कुंजी! Super TET Science: Metallurgy & Extraction of Metals - Key to Your Success!

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Author

Yadvendra Singh Pal

Founder & Director,Unictest. M.Sc (Maths), MCA & Full-Stack Developer. Former Senior Academic Counsellor with 3+ years of expertise in Teaching Exams (CTET, KVS, DSSSB) and JEE/NEET mentorship. I bridge the gap between complex exam pedagogy and intuitive technology to help students achieve success.Founder & Director Unictest. M.Sc (Maths) MCA & Full-Stack Developer. Former Senior Academic Counsellor with 3+ years of expertise in Teaching Exams (CTET KVS DSSSB) and JEE/NEET mentorship. I bridge the gap between complex exam pedagogy and intuitive technology to help students achieve success.

Updated: 2026-06-19 · हिंदी

SUPER TET Mock Test Series — Overview

नमस्ते मेरे प्यारे Super TET aspirants! Unictest में आपका स्वागत है। आज हम विज्ञान के एक बहुत ही महत्वपूर्ण और अक्सर कठिन लगने वाले टॉपिक 'Metallurgy और Extraction of Metals' (धातु कर्म और धातुओं का निष्कर्षण) पर चर्चा करेंगे। मैं जानता हूँ कि यह टॉपिक कई बार स्टूडेंट्स को थोड़ा confusing लगता है, लेकिन trust me, अगर आप इसे सही तरीके से समझें तो यह बहुत स्कोरिंग हो सकता है। Super TET Science सेक्शन में इस टॉपिक से 3-4 प्रश्न आसानी से आ जाते हैं, और ये प्रश्न सीधे-सीधे आपके मार्क्स बढ़ा सकते हैं।


जब मैं अपने स्टूडेंट्स को यह टॉपिक पढ़ाता हूँ, तो सबसे पहले मैं उन्हें इसका practical importance समझाता हूँ। सोचिए, हमारे चारों ओर जितनी भी धातुएं हैं - लोहा, तांबा, एल्यूमीनियम - ये सब प्रकृति में pure form में नहीं मिलतीं। इन्हें जमीन से निकालकर, कई प्रक्रियाओं से गुज़ारकर शुद्ध किया जाता है। यही पूरी प्रक्रिया 'Metallurgy' कहलाती है।


धातु कर्म (Metallurgy) क्या है?

सरल शब्दों में कहें तो, 'Metallurgy' विज्ञान और प्रौद्योगिकी की वह शाखा है जो धातुओं को उनके अयस्कों (ores) से निकालने, उन्हें शुद्ध करने और उनके गुणों को बेहतर बनाने से संबंधित है। इसमें अयस्कों की पहचान से लेकर शुद्ध धातु प्राप्त करने तक की सभी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं।


Expert Tip: Super TET में सीधे-सीधे परिभाषाएं कम पूछी जाती हैं, लेकिन प्रक्रियाओं के नाम और उनके उदाहरण बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। जैसे, 'froth flotation' किस अयस्क के लिए इस्तेमाल होता है? या 'calcination' और 'roasting' में क्या अंतर है?

अयस्क (Ores) और खनिज (Minerals) में अंतर

  • खनिज (Minerals): पृथ्वी की पपड़ी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रासायनिक पदार्थ जिनमें धातुएं उनके यौगिकों के रूप में होती हैं। सभी अयस्क खनिज होते हैं, लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं होते।
  • अयस्क (Ores): वे खनिज जिनसे धातुओं को आर्थिक रूप से और आसानी से निकाला जा सकता है। उदाहरण: बॉक्साइट (एल्यूमीनियम का अयस्क), हेमेटाइट (लोहे का अयस्क)।
  • गैंग (Gangue) या मैट्रिक्स: अयस्क के साथ मिली हुई अशुद्धियां जैसे मिट्टी, रेत, पत्थर। इन्हें हटाना ही धातु कर्म का पहला कदम होता है।

धातुओं के निष्कर्षण के प्रमुख चरण (Main Steps of Metal Extraction)

किसी भी धातु को उसके अयस्क से निकालने के लिए मुख्य रूप से तीन चरण होते हैं:

  1. अयस्क का सांद्रण (Concentration of Ore)
  2. सांद्रित अयस्क से कच्ची धातु प्राप्त करना (Extraction of Crude Metal from Concentrated Ore)
  3. कच्ची धातु का शोधन (Refining of Crude Metal)

चरण 1: अयस्क का सांद्रण (Concentration of Ore)

यह प्रक्रिया 'beneficiation' भी कहलाती है। इसमें अयस्क से गैंग (अशुद्धियों) को हटाया जाता है। अयस्क और गैंग के भौतिक गुणों में अंतर के आधार पर विभिन्न विधियाँ उपयोग की जाती हैं।


1. गुरुत्व पृथक्करण विधि (Hydraulic Washing/Gravity Separation)

यह विधि अयस्क और गैंग के घनत्व (density) में अंतर पर आधारित है। भारी अयस्क कणों को हल्के गैंग कणों से पानी की धारा में धोकर अलग किया जाता है। यह विधि मुख्यतः ऑक्साइड अयस्कों और मूल धातुओं के लिए उपयोग की जाती है।


2. चुंबकीय पृथक्करण विधि (Magnetic Separation)

यदि अयस्क या गैंग में से कोई एक चुंबकीय गुण वाला हो, तो इस विधि का उपयोग किया जाता है। अयस्क को पीसकर चुंबकीय रोलर्स वाली बेल्ट पर गिराया जाता है। चुंबकीय पदार्थ रोलर से चिपक कर अलग गिरता है, और गैर-चुंबकीय पदार्थ तुरंत गिर जाता है। उदाहरण: टिन स्टोन (कैसिटेराइट), क्रोमाइट, पाइरोलुसाइट (मैंगनीज अयस्क) और हेमेटाइट के लिए।


3. फेन प्लवन विधि (Froth Flotation Process)

यह विधि सल्फाइड अयस्कों के सांद्रण के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें अयस्क के कण तेल (पाइन तेल) से और गैंग के कण पानी से भीगते हैं। अयस्क के चूर्ण को पानी और पाइन तेल के साथ मिलाकर वायु प्रवाहित की जाती है। तेल अयस्क के कणों को ऊपर झाग (froth) के रूप में ले आता है, जबकि गैंग नीचे बैठ जाती है।


4. निक्षालन (Leaching)

यह एक रासायनिक विधि है जिसमें अयस्क को एक उपयुक्त विलायक (solvent) में घोलकर अशुद्धियों से अलग किया जाता है। बॉक्साइट (एल्यूमीनियम अयस्क), सोने और चांदी के निष्कर्षण में इस विधि का उपयोग होता है।


Caution: Super TET में इन विधियों के नाम और वे किस प्रकार के अयस्कों के लिए उपयोग होती हैं, यह बहुत पूछा जाता है। इन्हें अच्छे से याद कर लें!

Super TET Science Metallurgy MCQs - Part 1

चलिए, अब कुछ प्रश्नों का अभ्यास करते हैं जिससे आपको पता चले कि Super TET में कैसे सवाल आते हैं।


Q.1 धातु कर्म में 'गैंग' (Gangue) शब्द का क्या अर्थ है?
  • A) अयस्क से प्राप्त शुद्ध धातु
  • B) अयस्क में मौजूद अवांछित अशुद्धियां
  • C) धातुओं को पिघलाने की प्रक्रिया
  • D) धातु को चमकाने के लिए उपयोग किया जाने वाला पदार्थ
Answer: B) अयस्क में मौजूद अवांछित अशुद्धियां

Q.2 फेन प्लवन विधि (Froth Flotation Process) का उपयोग मुख्य रूप से किस प्रकार के अयस्कों के सांद्रण के लिए किया जाता है?
  • A) ऑक्साइड अयस्क
  • B) सल्फाइड अयस्क
  • C) कार्बोनेट अयस्क
  • D) हैलाइड अयस्क
Answer: B) सल्फाइड अयस्क

Q.3 बॉक्साइट किस धातु का प्रमुख अयस्क है?
  • A) लोहा
  • B) तांबा
  • C) एल्यूमीनियम
  • D) जस्ता
Answer: C) एल्यूमीनियम

Q.4 चुंबकीय पृथक्करण विधि (Magnetic Separation) का उपयोग कब किया जाता है?
  • A) जब अयस्क और गैंग दोनों चुंबकीय हों
  • B) जब अयस्क या गैंग में से कोई एक चुंबकीय हो
  • C) जब अयस्क और गैंग दोनों गैर-चुंबकीय हों
  • D) जब अयस्क पानी में घुलनशील हो
Answer: B) जब अयस्क या गैंग में से कोई एक चुंबकीय हो

Q.5 निक्षालन (Leaching) विधि किस अयस्क के सांद्रण में प्रयुक्त होती है?
  • A) हेमेटाइट
  • B) जिंक ब्लेंड
  • C) बॉक्साइट
  • D) कॉपर पाइराइट
Answer: C) बॉक्साइट

Q.6 'मिनरल' और 'अयस्क' में क्या अंतर है?
  • A) कोई अंतर नहीं है
  • B) सभी अयस्क खनिज हैं, लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं हैं
  • C) सभी खनिज अयस्क हैं, लेकिन सभी अयस्क खनिज नहीं हैं
  • D) अयस्क शुद्ध धातु होते हैं, जबकि खनिज नहीं
Answer: B) सभी अयस्क खनिज हैं, लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं हैं

Q.7 गुरुत्व पृथक्करण विधि (Hydraulic Washing) किस सिद्धांत पर आधारित है?
  • A) चुंबकीय गुण
  • B) घनत्व में अंतर
  • C) रासायनिक अभिक्रिया
  • D) वाष्पीकरण
Answer: B) घनत्व में अंतर

Q.8 आयरन के अयस्क हेमेटाइट का सांद्रण किस विधि से किया जा सकता है?
  • A) फेन प्लवन विधि
  • B) निक्षालन
  • C) चुंबकीय पृथक्करण
  • D) गुरुत्व पृथक्करण
Answer: C) चुंबकीय पृथक्करण

Q.9 सल्फाइड अयस्कों के सांद्रण के लिए कौन सा तेल अक्सर फेन प्लवन विधि में उपयोग किया जाता है?
  • A) नारियल का तेल
  • B) सरसों का तेल
  • C) पाइन तेल
  • D) सूरजमुखी का तेल
Answer: C) पाइन तेल

Q.10 एल्यूमीनियम के निष्कर्षण में बॉक्साइट अयस्क के सांद्रण के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है?
  • A) चुंबकीय पृथक्करण
  • B) फेन प्लवन विधि
  • C) निक्षालन
  • D) गुरुत्व पृथक्करण
Answer: C) निक्षालन

मेरे प्यारे छात्रों, मुझे उम्मीद है कि ये प्रश्न आपको इस टॉपिक की गहराई को समझने में मदद कर रहे होंगे। याद रखिए, Super TET में सफलता के लिए हर छोटे-बड़े टॉपिक पर पकड़ बनाना ज़रूरी है!

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चरण 2: सांद्रित अयस्क से कच्ची धातु प्राप्त करना (Extraction of Crude Metal)

सांद्रण के बाद, अयस्क को धातु ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है, क्योंकि ऑक्साइड से धातु निकालना आसान होता है। फिर, इस ऑक्साइड को अपचयन (reduction) द्वारा धातु में बदला जाता है।


1. भर्जन (Roasting)

यह विधि सल्फाइड अयस्कों के लिए उपयोग की जाती है। इसमें अयस्क को वायु की उपस्थिति में उसके गलनांक (melting point) से नीचे के तापमान पर गर्म किया जाता है।
उदाहरण: 2ZnS (जिंक सल्फाइड) + 3O₂ (वायु) → 2ZnO (जिंक ऑक्साइड) + 2SO₂ (सल्फर डाइऑक्साइड)


2. निस्तापन (Calcination)

यह विधि कार्बोनेट और हाइड्रेटेड अयस्कों के लिए उपयोग की जाती है। इसमें अयस्क को वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में उसके गलनांक से नीचे के तापमान पर गर्म किया जाता है।
उदाहरण: ZnCO₃ (जिंक कार्बोनेट) → ZnO (जिंक ऑक्साइड) + CO₂ (कार्बन डाइऑक्साइड)


Expert Tip: Roasting और Calcination में मुख्य अंतर वायु की उपस्थिति/अनुपस्थिति का होता है। Roasting में वायु की उपस्थिति होती है, Calcination में अनुपस्थिति। यह Super TET के लिए एक बहुत ही favorite प्रश्न है!

3. अपचयन (Reduction)

धातु ऑक्साइड को शुद्ध धातु में बदलने की प्रक्रिया को अपचयन कहते हैं। यह कई तरीकों से हो सकता है:

  • कार्बन अपचयन (Reduction by Carbon): अधिक अभिक्रियाशील धातुओं के ऑक्साइड को कोक या कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ गर्म करके अपचयित किया जाता है। जैसे, ZnO + C → Zn + CO।
  • एल्यूमिनोथर्मिक प्रक्रिया (Aluminothermic Process): अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं (जैसे मैंगनीज, क्रोमियम) के ऑक्साइड को एल्यूमीनियम चूर्ण से अपचयित किया जाता है। यह एक ऊष्माक्षेपी (exothermic) अभिक्रिया है।
  • विद्युत अपघटनी अपचयन (Electrolytic Reduction): अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं (जैसे सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, एल्यूमीनियम) के गलित (molten) लवणों का विद्युत अपघटन करके धातु प्राप्त की जाती है। एल्यूमीनियम का निष्कर्षण बॉक्साइट से इसी विधि से होता है।
  • स्व-अपचयन (Self-Reduction): कुछ कम अभिक्रियाशील धातुओं (जैसे पारा, तांबा, सीसा) के सल्फाइड अयस्कों को वायु में भर्जित करने पर वे सीधे धातु में अपचयित हो जाते हैं।

चरण 3: कच्ची धातु का शोधन (Refining of Crude Metal)

निष्कर्षण के बाद प्राप्त धातु में अभी भी कुछ अशुद्धियां होती हैं। इन्हें हटाने के लिए शोधन (refining) किया जाता है।


1. आसवन (Distillation)

कम क्वथनांक (low boiling point) वाली धातुओं जैसे जिंक, कैडमियम, पारा के लिए। अशुद्ध धातु को गर्म करके वाष्पीकृत किया जाता है, और शुद्ध धातु संघनित होकर अलग हो जाती है।


2. द्रवण (Liquation)

कम गलनांक (low melting point) वाली धातुओं जैसे टिन, सीसा के लिए। अशुद्ध धातु को ढलान वाली सतह पर गर्म किया जाता है, शुद्ध धातु पिघलकर बह जाती है, जबकि उच्च गलनांक वाली अशुद्धियां पीछे रह जाती हैं।


3. विद्युत अपघटनी शोधन (Electrolytic Refining)

यह सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली विधि है। तांबा, जिंक, टिन, चांदी, सोना जैसी धातुओं के शोधन के लिए। इसमें अशुद्ध धातु को एनोड, शुद्ध धातु की पतली पट्टी को कैथोड और धातु के लवण के घोल को विद्युत अपघट्य (electrolyte) के रूप में उपयोग किया जाता है। विद्युत धारा प्रवाहित करने पर एनोड से शुद्ध धातु कैथोड पर जमा हो जाती है।


4. मंडल परिष्करण (Zone Refining)

अत्यधिक शुद्ध धातुओं (जैसे सिलिकॉन, जर्मेनियम - सेमीकंडक्टर) के लिए। यह सिद्धांत पर आधारित है कि अशुद्धियां गलित अवस्था में शुद्ध धातु की तुलना में अधिक घुलनशील होती हैं।


5. वाष्प प्रावस्था परिष्करण (Vapour Phase Refining)

इसमें धातु को एक वाष्पशील यौगिक में परिवर्तित किया जाता है, फिर उसे विघटित करके शुद्ध धातु प्राप्त की जाती है। उदाहरण: Mond Process (निकेल के लिए), Van Arkel Method (जिरकोनियम और टाइटेनियम के लिए)।


देखिये दोस्तों, यह टॉपिक थोड़ा लंबा है, लेकिन हर प्रक्रिया की बेसिक जानकारी और उसके उदाहरण Super TET के लिए पर्याप्त हैं। पिछले 5 साल में मैंने नोटिस किया है कि इस सेक्शन से 'कौन सी विधि किस धातु के लिए है' या 'किस प्रक्रिया में क्या होता है' जैसे सीधे-सीधे प्रश्न आते हैं। अगर आप सिर्फ NCERT की किताबों को भी अच्छे से पढ़ लें तो आपका काम बन जाएगा।


Super TET Science Metallurgy MCQs - Part 2

चलिए, अब कुछ और प्रश्नों का अभ्यास करते हैं।


Q.11 सल्फाइड अयस्कों को वायु की उपस्थिति में गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
  • A) निस्तापन (Calcination)
  • B) भर्जन (Roasting)
  • C) निक्षालन (Leaching)
  • D) द्रवण (Liquation)
Answer: B) भर्जन (Roasting)

Q.12 कार्बोनेट अयस्कों को वायु की अनुपस्थिति में गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
  • A) भर्जन (Roasting)
  • B) निस्तापन (Calcination)
  • C) प्रगलन (Smelting)
  • D) विद्युत अपघटन (Electrolysis)
Answer: B) निस्तापन (Calcination)

Q.13 एल्यूमीनियम धातु का निष्कर्षण किस विधि द्वारा किया जाता है?
  • A) कार्बन अपचयन
  • B) विद्युत अपघटनी अपचयन
  • C) द्रवण
  • D) मंडल परिष्करण
Answer: B) विद्युत अपघटनी अपचयन

Q.14 उच्च गलनांक वाली धातुओं जैसे टिन और सीसा के शोधन के लिए कौन सी विधि उपयुक्त है?
  • A) आसवन
  • B) द्रवण
  • C) विद्युत अपघटनी शोधन
  • D) मंडल परिष्करण
Answer: B) द्रवण

Q.15 तांबे के विद्युत अपघटनी शोधन में, अशुद्ध तांबे को कहाँ रखा जाता है?
  • A) कैथोड पर
  • B) एनोड पर
  • C) विद्युत अपघट्य में
  • D) इनमें से कोई नहीं
Answer: B) एनोड पर

Q.16 सिलिकॉन और जर्मेनियम जैसी अत्यधिक शुद्ध धातुओं के लिए कौन सी शोधन विधि उपयोग की जाती है?
  • A) आसवन
  • B) द्रवण
  • C) विद्युत अपघटनी शोधन
  • D) मंडल परिष्करण (Zone Refining)
Answer: D) मंडल परिष्करण (Zone Refining)

Q.17 निकेल धातु के शोधन के लिए कौन सी वाष्प प्रावस्था परिष्करण विधि है?
  • A) वान आर्केल विधि
  • B) मॉन्ड प्रक्रम
  • C) बेयर प्रक्रम
  • D) हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रम
Answer: B) मॉन्ड प्रक्रम

Q.18 लोहे के निष्कर्षण में वात्या भट्टी (Blast Furnace) में हेमेटाइट अयस्क के साथ क्या मिलाया जाता है?
  • A) कोयला और चूना पत्थर
  • B) एल्यूमीनियम पाउडर
  • C) कॉपर पाइराइट
  • D) जिंक कार्बोनेट
Answer: A) कोयला और चूना पत्थर

Q.19 क्रोमियम और मैंगनीज जैसी धातुओं के ऑक्साइड के अपचयन के लिए कौन सी विधि का उपयोग किया जाता है?
  • A) कार्बन अपचयन
  • B) विद्युत अपघटनी अपचयन
  • C) एल्यूमिनोथर्मिक प्रक्रिया
  • D) स्व-अपचयन
Answer: C) एल्यूमिनोथर्मिक प्रक्रिया

Q.20 निम्नलिखित में से कौन सी धातु उसके गलित लवण के विद्युत अपघटन द्वारा प्राप्त नहीं की जा सकती है?
  • A) सोडियम
  • B) पोटेशियम
  • C) एल्यूमीनियम
  • D) लोहा
Answer: D) लोहा

बहुत बढ़िया! मुझे उम्मीद है कि इन प्रश्नों ने आपको इस टॉपिक को और बेहतर तरीके से समझने में मदद की होगी। इन सभी प्रक्रियाओं को एक बार फिर से रिवाइज कर लें, खासकर उनके उदाहरण और वे किस प्रकार के अयस्कों पर लागू होती हैं। आपकी Super TET की तैयारी में यह एक महत्वपूर्ण कदम है!

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Frequently Asked Questions (SUPER TET)

Super TET Science सेक्शन में 'Metallurgy और Extraction of Metals' (धातु कर्म और धातुओं का निष्कर्षण) टॉपिक से आमतौर पर 3 से 4 प्रश्न पूछे जा सकते हैं। ये प्रश्न सीधे-सीधे सिद्धांतों, प्रक्रियाओं के नाम, उनके उदाहरण या किस धातु के लिए कौन सी विधि प्रयुक्त होती है, पर आधारित होते हैं। यह एक स्कोरिंग टॉपिक है, इसलिए इसे अच्छे से तैयार करना आपकी रैंक में सुधार कर सकता है। पिछले कुछ वर्षों के पेपरों का विश्लेषण करने पर यह देखा गया है कि इस खंड से प्रश्न नियमित रूप से आते हैं।

Super TET 2026 के लिए आवेदन करने हेतु उम्मीदवार के पास स्नातक की डिग्री के साथ-साथ B.Ed, BTC, D.El.Ed या समकक्ष शिक्षक प्रशिक्षण डिप्लोमा होना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, उम्मीदवार को CTET या UPTET परीक्षा उत्तीर्ण होना भी आवश्यक है। आयु सीमा आमतौर पर 21 से 40 वर्ष के बीच होती है, हालांकि आरक्षित श्रेणियों को सरकारी नियमों के अनुसार छूट प्रदान की जाती है। विस्तृत पात्रता मानदंड के लिए आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए।

Super TET Science में 'Metallurgy और Extraction of Metals' की तैयारी के लिए सबसे अच्छी शुरुआत NCERT की कक्षा 9वीं और 10वीं की विज्ञान की किताबों से करें। ये किताबें मूलभूत सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से समझाती हैं। इसके अलावा, आप अरिहंत (Arihant) या उपकार (Upkar) प्रकाशन की Super TET Science गाइड बुक्स का भी उपयोग कर सकते हैं, जिनमें पिछले वर्षों के प्रश्न और अभ्यास सेट शामिल होते हैं। Unictest के ऑनलाइन मॉक टेस्ट और स्टडी नोट्स भी आपकी तैयारी में काफी सहायक होंगे।

Super TET परीक्षा में कुल 150 प्रश्न होते हैं और प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का होता है, जिससे कुल पूर्णांक 150 होते हैं। Science सेक्शन से 10 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनके लिए 10 अंक निर्धारित होते हैं। Super TET परीक्षा में कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होती है। इसका मतलब है कि गलत उत्तरों के लिए कोई अंक नहीं काटे जाते हैं। इसलिए, छात्रों को सभी प्रश्नों का प्रयास करने की सलाह दी जाती है, भले ही वे कुछ प्रश्नों के उत्तर को लेकर पूरी तरह निश्चित न हों।

Super TET क्वालीफाई करने के बाद आप उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक या उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्त होते हैं। यह एक स्थायी सरकारी नौकरी है जिसमें अच्छा वेतनमान और अन्य भत्ते शामिल होते हैं। सहायक अध्यापक का प्रारंभिक वेतनमान लगभग ₹40,000 से ₹45,000 प्रति माह (भत्तों सहित) हो सकता है, जो अनुभव और पदोन्नति के साथ बढ़ता रहता है। इसके अतिरिक्त, सरकारी शिक्षक को सामाजिक प्रतिष्ठा, जॉब सिक्योरिटी और बच्चों के भविष्य निर्माण में योगदान करने का अवसर मिलता है।

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