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Mock Tests 2026

Super TET Kohlberg Moral Development Practice Set 2026: CDP के महत्वपूर्ण प्रश्न

Super TET CDP: Kohlberg के नैतिक विकास सिद्धांत पर आधारित महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न | आपकी सफलता, हमारा लक्ष्य!

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Author

Yadvendra Singh Pal

Founder & Director,Unictest. M.Sc (Maths), MCA & Full-Stack Developer. Former Senior Academic Counsellor with 3+ years of expertise in Teaching Exams (CTET, KVS, DSSSB) and JEE/NEET mentorship. I bridge the gap between complex exam pedagogy and intuitive technology to help students achieve success.Founder & Director Unictest. M.Sc (Maths) MCA & Full-Stack Developer. Former Senior Academic Counsellor with 3+ years of expertise in Teaching Exams (CTET KVS DSSSB) and JEE/NEET mentorship. I bridge the gap between complex exam pedagogy and intuitive technology to help students achieve success.

Updated: 2026-06-17 · हिंदी

SUPER TET Mock Test Series — Overview

नमस्ते Super TET aspirants! Unictest पर आपका स्वागत है। आज हम बात करेंगे Super TET 2026 की तैयारी में Child Development and Pedagogy (CDP) सेक्शन के एक बेहद महत्वपूर्ण टॉपिक - लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धांत (Kohlberg"s Theory of Moral Development) के बारे में। Dekhiye dosto, यह एक ऐसा टॉपिक है जिससे हर साल 2-3 प्रश्न सीधे-सीधे पूछे जाते हैं, और अगर आपने इसे अच्छे से समझ लिया, तो ये मार्क्स आपके पक्के हैं।


बहुत से स्टूडेंट्स इस थ्योरी को सिर्फ रट लेते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि इसे समझना ज्यादा जरूरी है। जब मैं अपने स्टूडेंट्स को यह टॉपिक पढ़ाता हूँ, तो सबसे पहले उन्हें Heinz Dilemma की कहानी सुनाता हूँ, ताकि उन्हें नैतिक दुविधा (moral dilemma) का कॉन्सेप्ट समझ आ सके। कोहलबर्ग का पूरा सिद्धांत इसी दुविधा और उस पर व्यक्ति की प्रतिक्रिया पर आधारित है।


कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत: एक विस्तृत अवलोकन

लॉरेंस कोहलबर्ग ने जीन पियाजे के नैतिक विकास के सिद्धांत को आगे बढ़ाया और अपना विस्तृत सिद्धांत प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि बच्चों में नैतिक तर्क (moral reasoning) का विकास विभिन्न चरणों में होता है। यह सिर्फ सही और गलत जानने की बात नहीं है, बल्कि उस 'सही' या 'गलत' के पीछे के तर्क को समझने की बात है। उन्होंने अपने सिद्धांत को तीन स्तरों (Levels) और प्रत्येक स्तर में दो-दो अवस्थाओं (Stages) में बांटा है, कुल मिलाकर छह अवस्थाएँ


Expert Tip: Super TET में अक्सर इन अवस्थाओं की विशेषताओं या किसी उदाहरण के आधार पर बच्चे की नैतिक अवस्था पहचानने वाले प्रश्न आते हैं। इसलिए, हर अवस्था को उसके उदाहरणों के साथ समझना बहुत जरूरी है।

स्तर 1: पूर्व-पारंपरिक नैतिकता (Pre-conventional Morality)

  • इस स्तर पर बच्चे का नैतिक तर्क बाहरी परिणामों (external consequences) और व्यक्तिगत जरूरतों पर आधारित होता है।
  • बच्चा नियमों का पालन सजा से बचने या पुरस्कार पाने के लिए करता है।
अवस्था 1: दंड और आज्ञाकारिता उन्मुखीकरण (Punishment and Obedience Orientation)
  • बच्चा गलत काम नहीं करता क्योंकि उसे सजा का डर होता है।
  • 'सही' वह है जिससे सजा न मिले।
अवस्था 2: वैयक्तिक और विनिमय उन्मुखीकरण (Individualism and Exchange / Instrumental Relativist Orientation)
  • 'जैसे को तैसा' या 'तुम मेरी पीठ खुजाओ, मैं तुम्हारी खुजाऊंगा' वाली सोच।
  • नैतिकता व्यक्तिगत जरूरतों और इच्छाओं की पूर्ति पर आधारित होती है।

स्तर 2: पारंपरिक नैतिकता (Conventional Morality)

  • इस स्तर पर व्यक्ति समाज के नियमों, अपेक्षाओं और संबंधों को महत्व देता है।
  • नैतिकता सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने और दूसरों की स्वीकृति प्राप्त करने पर केंद्रित होती है।
अवस्था 3: अच्छे अंतर्वैयक्तिक संबंध (Good Interpersonal Relationships / "Good Boy-Good Girl" Orientation)
  • दूसरों की नजर में अच्छा बनने की चाहत।
  • नैतिकता दूसरों को खुश करने या उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने पर आधारित होती है।
अवस्था 4: कानून और व्यवस्था उन्मुखीकरण (Maintaining Social Order / Law and Order Orientation)
  • नियमों और कानूनों का पालन करना महत्वपूर्ण है क्योंकि वे समाज को व्यवस्थित रखते हैं।
  • कानूनों का सम्मान करना और अपने कर्तव्यों का पालन करना नैतिक है।

स्तर 3: उत्तर-पारंपरिक नैतिकता (Post-conventional Morality)

  • इस स्तर पर व्यक्ति अपने स्वयं के नैतिक सिद्धांतों और मूल्यों का विकास करता है।
  • नैतिकता सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों और व्यक्तिगत अधिकारों पर आधारित होती है।
अवस्था 5: सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार (Social Contract and Individual Rights Orientation)
  • कानून और नियम समाज के भले के लिए होते हैं, लेकिन अगर वे व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन करें तो उन्हें बदला जा सकता है।
  • लोकतंत्र और बहुमत की राय को महत्व दिया जाता है।
अवस्था 6: सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत (Universal Ethical Principles Orientation)
  • यह नैतिक विकास का उच्चतम स्तर है।
  • व्यक्ति सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों जैसे न्याय, समानता, मानव गरिमा के आधार पर निर्णय लेता है, भले ही वे मौजूदा कानूनों के खिलाफ हों।

Pichle 5 saal mein maine notice kiya hai ki Super TET mein is section se questions direct definitions, examples ya फिर किसी बच्चे के व्यवहार को देखकर उसकी अवस्था पहचानने के रूप में आते हैं। इसलिए, हर स्टेज की key characteristics को दिमाग में बिठाना बहुत जरूरी है।


Super TET Kohlberg Moral Development Practice Set: प्रश्न 1-10

चलिए, अब कुछ प्रश्नों के माध्यम से अपनी समझ को परखते हैं। ये प्रश्न Super TET के पिछले वर्षों के पैटर्न पर आधारित हैं:


Q. 1. कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धांत के अनुसार, 'दंड से बचने' के लिए नियमों का पालन करना किस अवस्था को दर्शाता है?
  • A) सामाजिक अनुबंध उन्मुखीकरण
  • B) दंड और आज्ञाकारिता उन्मुखीकरण
  • C) अच्छा लड़का/अच्छी लड़की उन्मुखीकरण
  • D) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत उन्मुखीकरण
Answer: B) दंड और आज्ञाकारिता उन्मुखीकरण
Q. 2. एक बच्चा कहता है, "मुझे होमवर्क पूरा करना चाहिए क्योंकि अगर मैं नहीं करूँगा तो टीचर मुझे डांटेगी।" कोहलबर्ग के अनुसार, यह बच्चा नैतिक विकास के किस स्तर पर है?
  • A) पारंपरिक स्तर
  • B) पूर्व-पारंपरिक स्तर
  • C) उत्तर-पारंपरिक स्तर
  • D) इनमें से कोई नहीं
Answer: B) पूर्व-पारंपरिक स्तर
Q. 3. कोहलबर्ग के किस स्तर पर व्यक्ति सामाजिक नियमों और कानूनों को बनाए रखने को सबसे महत्वपूर्ण मानता है?
  • A) पूर्व-पारंपरिक स्तर
  • B) पारंपरिक स्तर
  • C) उत्तर-पारंपरिक स्तर
  • D) इनमें से कोई नहीं
Answer: B) पारंपरिक स्तर
Q. 4. "यह सही है कि मैं अपनी दोस्त की मदद करूँ क्योंकि एक अच्छा दोस्त ऐसा ही करता है।" यह कथन कोहलबर्ग के किस अवस्था को दर्शाता है?
  • A) वैयक्तिक और विनिमय उन्मुखीकरण
  • B) दंड और आज्ञाकारिता उन्मुखीकरण
  • C) अच्छे अंतर्वैयक्तिक संबंध उन्मुखीकरण
  • D) कानून और व्यवस्था उन्मुखीकरण
Answer: C) अच्छे अंतर्वैयक्तिक संबंध उन्मुखीकरण
Q. 5. कोहलबर्ग के नैतिक विकास के किस स्तर पर व्यक्ति अपने स्वयं के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है, भले ही वे समाज के नियमों के खिलाफ हों?
  • A) पूर्व-पारंपरिक स्तर
  • B) पारंपरिक स्तर
  • C) उत्तर-पारंपरिक स्तर
  • D) इनमें से कोई नहीं
Answer: C) उत्तर-पारंपरिक स्तर
Q. 6. 'सामाजिक अनुबंध उन्मुखीकरण' कोहलबर्ग के किस स्तर से संबंधित है?
  • A) पूर्व-पारंपरिक
  • B) पारंपरिक
  • C) उत्तर-पारंपरिक
  • D) इनमें से कोई नहीं
Answer: C) उत्तर-पारंपरिक
Q. 7. एक व्यक्ति मानता है कि कानून महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अगर वे अन्यायपूर्ण हों तो उन्हें बदला जाना चाहिए। यह कोहलबर्ग की कौन सी अवस्था है?
  • A) कानून और व्यवस्था उन्मुखीकरण
  • B) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत उन्मुखीकरण
  • C) सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार उन्मुखीकरण
  • D) दंड और आज्ञाकारिता उन्मुखीकरण
Answer: C) सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार उन्मुखीकरण
Q. 8. कोहलबर्ग के सिद्धांत में 'जैसे को तैसा' की अवधारणा किस अवस्था में पाई जाती है?
  • A) दंड और आज्ञाकारिता उन्मुखीकरण
  • B) वैयक्तिक और विनिमय उन्मुखीकरण
  • C) अच्छे अंतर्वैयक्तिक संबंध उन्मुखीकरण
  • D) कानून और व्यवस्था उन्मुखीकरण
Answer: B) वैयक्तिक और विनिमय उन्मुखीकरण
Q. 9. कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की मुख्य आलोचना क्या है?
  • A) यह केवल बच्चों पर लागू होता है।
  • B) यह सांस्कृतिक रूप से पक्षपातपूर्ण है और महिलाओं के नैतिक तर्क को कम आंकता है।
  • C) इसमें पर्याप्त अवस्थाएँ नहीं हैं।
  • D) यह नैतिक दुविधाओं पर आधारित नहीं है।
Answer: B) यह सांस्कृतिक रूप से पक्षपातपूर्ण है और महिलाओं के नैतिक तर्क को कम आंकता है।
Q. 10. कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास की 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' अवस्था में व्यक्ति किस पर आधारित होकर निर्णय लेता है?
  • A) सामाजिक स्वीकृति
  • B) व्यक्तिगत लाभ
  • C) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत जैसे न्याय और समानता
  • D) कानून और व्यवस्था
Answer: C) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत जैसे न्याय और समानता

याद रखिए, सिर्फ प्रश्नों को हल करना ही काफी नहीं है, बल्कि हर प्रश्न के पीछे के तर्क को समझना और यह जानना कि कौन सा विकल्प सही क्यों है और बाकी गलत क्यों हैं, यह आपकी तैयारी को और मजबूत करेगा। Super TET 2024 की परीक्षा में मैंने देखा है कि कई बार प्रश्न सीधे न पूछकर घुमा फिरा कर पूछे जाते हैं, जहाँ कॉन्सेप्ट की गहरी समझ ही काम आती है।

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Test Series Features

Super TET में Kohlberg के सिद्धांत की तैयारी के लिए रणनीति

Ab yahan ek important baat samajh lijiye – सिर्फ कोहलबर्ग का सिद्धांत ही नहीं, बल्कि पूरा CDP सेक्शन आपकी Super TET की सफलता में एक गेम-चेंजर हो सकता है। यह सेक्शन आपको बाकी उम्मीदवारों से आगे निकलने में मदद कर सकता है, खासकर यदि आप इसे सही रणनीति के साथ तैयार करते हैं।


विषय-वार तैयारी: Kohlberg और CDP

  • कॉन्सेप्ट क्लैरिटी: सबसे पहले, कोहलबर्ग के तीनों स्तरों और छह अवस्थाओं को उनके उदाहरणों के साथ अच्छे से समझें। 'Heinz Dilemma' जैसे उदाहरणों को याद रखें।
  • तुलनात्मक अध्ययन: पियाजे और कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धांतों की तुलना करें। अक्सर प्रश्न इन दोनों के बीच के अंतर या समानता पर भी आधारित होते हैं।
  • कीवर्ड्स पर ध्यान दें: हर अवस्था के कुछ विशिष्ट कीवर्ड्स होते हैं (जैसे, दंड से बचना, पुरस्कार पाना, अच्छा लड़का/लड़की, कानून का पालन, सार्वभौमिक सिद्धांत)। इन्हें याद रखें।
  • एनसीईआरटी को प्राथमिकता: कक्षा 8-10 की मनोविज्ञान की एनसीईआरटी किताबों में बाल विकास और नैतिकता से संबंधित अध्याय दिए गए हैं। इन्हें जरूर पढ़ें।
  • प्रीवियस ईयर पेपर्स (PYQs): पिछले 5-7 सालों के Super TET, CTET, UPTET, KVS, DSSSB के CDP सेक्शन के प्रश्नपत्रों को हल करें। आपको प्रश्नों का पैटर्न और महत्वपूर्ण टॉपिक्स का अंदाजा हो जाएगा। मेरा खुद का अनुभव है कि 40% प्रश्न पैटर्न में रिपीट होते हैं!

Expert Tip: एक छोटा सा माइंड मैप या फ्लोचार्ट बनाएं जिसमें कोहलबर्ग के प्रत्येक स्तर और अवस्था को एक-दो लाइन में परिभाषित किया गया हो। यह रिवीजन के समय बहुत काम आता है।

अनुशंसित पुस्तकें और संसाधन (Recommended Books & Resources)

  • NCERT Psychology Books: कक्षा 11 और 12 की मनोविज्ञान की पुस्तकें बाल विकास के सिद्धांतों के लिए बहुत अच्छी हैं।
  • बी.एड/डी.एल.एड की पाठ्यपुस्तकें: आपके टीचिंग कोर्स की किताबें भी CDP के लिए उपयोगी होंगी।
  • Unictest के स्टडी नोट्स: हमारी वेबसाइट पर आपको कोहलबर्ग सहित सभी महत्वपूर्ण सिद्धांतों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए नोट्स मिलेंगे।
  • ऑनलाइन मॉक टेस्ट: Unictest पर उपलब्ध Super TET के मॉक टेस्ट सीरीज को नियमित रूप से दें। यह आपकी स्पीड और एक्यूरेसी को बढ़ाएगा।

अध्ययन अनुसूची और समय प्रबंधन (Study Schedule & Time Management)

Super TET एक बड़ी परीक्षा है, और इसके लिए एक सुनियोजित रणनीति बहुत जरूरी है।

  • दैनिक लक्ष्य निर्धारित करें: हर दिन CDP के लिए कम से कम 1-1.5 घंटा आवंटित करें।
  • सप्ताह-वार योजना: एक सप्ताह में एक या दो प्रमुख सिद्धांतों (जैसे कोहलबर्ग, पियाजे, वायगोत्स्की) को गहराई से कवर करने का लक्ष्य रखें।
  • रिवीजन को प्राथमिकता: जो पढ़ा है उसे हर तीसरे दिन या सप्ताह के अंत में रिवाइज जरूर करें। बिना रिवीजन के सब व्यर्थ है।
  • प्रैक्टिस, प्रैक्टिस, प्रैक्टिस: जितना हो सके MCQs हल करें। गलतियों से सीखें और अपनी कमजोरियों पर काम करें।

Super TET Kohlberg Moral Development Practice Set: प्रश्न 11-20

चलिए, कुछ और प्रश्नों के साथ अपनी तैयारी को आगे बढ़ाते हैं। ये प्रश्न आपको विभिन्न प्रकार के परिदृश्यों को समझने में मदद करेंगे:


Q. 11. कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' अवस्था किस स्तर पर आती है?
  • A) पूर्व-पारंपरिक स्तर
  • B) पारंपरिक स्तर
  • C) उत्तर-पारंपरिक स्तर
  • D) इनमें से कोई नहीं
Answer: C) उत्तर-पारंपरिक स्तर
Q. 12. एक बच्चा खिलौना लेने के लिए अपने भाई को धक्का देता है। कोहलबर्ग के अनुसार, यह किस अवस्था का उदाहरण हो सकता है?
  • A) दंड और आज्ञाकारिता उन्मुखीकरण
  • B) वैयक्तिक और विनिमय उन्मुखीकरण
  • C) अच्छे अंतर्वैयक्तिक संबंध उन्मुखीकरण
  • D) कानून और व्यवस्था उन्मुखीकरण
Answer: B) वैयक्तिक और विनिमय उन्मुखीकरण (बच्चे की अपनी इच्छा पूर्ति)
Q. 13. कोहलबर्ग के अनुसार, नैतिक विकास के किस स्तर पर व्यक्ति का नैतिक तर्क सामाजिक अपेक्षाओं और नियमों से बंधा होता है?
  • A) पूर्व-पारंपरिक स्तर
  • B) पारंपरिक स्तर
  • C) उत्तर-पारंपरिक स्तर
  • D) इनमें से कोई नहीं
Answer: B) पारंपरिक स्तर
Q. 14. 'Heinz Dilemma' का उपयोग कोहलबर्ग ने अपने सिद्धांत में क्या मापने के लिए किया था?
  • A) बुद्धिमत्ता
  • B) नैतिक व्यवहार
  • C) नैतिक तर्क
  • D) व्यक्तित्व
Answer: C) नैतिक तर्क
Q. 15. एक बच्चा कहता है, "अगर मैं अपनी माँ की मदद करूँगा, तो वह मुझे आइसक्रीम देंगी।" यह कोहलबर्ग की किस अवस्था को दर्शाता है?
  • A) दंड और आज्ञाकारिता उन्मुखीकरण
  • B) वैयक्तिक और विनिमय उन्मुखीकरण
  • C) अच्छे अंतर्वैयक्तिक संबंध उन्मुखीकरण
  • D) कानून और व्यवस्था उन्मुखीकरण
Answer: B) वैयक्तिक और विनिमय उन्मुखीकरण
Q. 16. कोहलबर्ग के अनुसार, किस अवस्था में व्यक्ति कानून को एक सामाजिक अनुबंध के रूप में देखता है जिसे बदला जा सकता है यदि यह समाज के लिए हानिकारक हो?
  • A) कानून और व्यवस्था उन्मुखीकरण
  • B) सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत उन्मुखीकरण
  • C) सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार उन्मुखीकरण
  • D) अच्छे अंतर्वैयक्तिक संबंध उन्मुखीकरण
Answer: C) सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार उन्मुखीकरण
Q. 17. नैतिक विकास का कौन सा स्तर किशोरावस्था के बाद अक्सर विकसित होता है?
  • A) पूर्व-पारंपरिक स्तर
  • B) पारंपरिक स्तर
  • C) उत्तर-पारंपरिक स्तर
  • D) ये सभी स्तर किसी भी उम्र में विकसित हो सकते हैं।
Answer: C) उत्तर-पारंपरिक स्तर
Q. 18. कोहलबर्ग के सिद्धांत को किस मनोवैज्ञानिक ने लिंग-पक्षपाती (gender-biased) कहकर आलोचना की थी?
  • A) जीन पियाजे
  • B) लेव वायगोत्स्की
  • C) अल्बर्ट बंडूरा
  • D) कैरोल गिलिगन
Answer: D) कैरोल गिलिगन
Q. 19. एक बच्चा अपने दोस्तों के साथ इसलिए अच्छा व्यवहार करता है क्योंकि वह चाहता है कि वे उसे पसंद करें। यह कोहलबर्ग के किस अवस्था को दर्शाता है?
  • A) दंड और आज्ञाकारिता उन्मुखीकरण
  • B) वैयक्तिक और विनिमय उन्मुखीकरण
  • C) अच्छे अंतर्वैयक्तिक संबंध उन्मुखीकरण
  • D) कानून और व्यवस्था उन्मुखीकरण
Answer: C) अच्छे अंतर्वैयक्तिक संबंध उन्मुखीकरण
Q. 20. कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत का मुख्य फोकस क्या है?
  • A) नैतिक व्यवहार का विकास
  • B) नैतिक भावनाओं का विकास
  • C) नैतिक तर्क का विकास
  • D) नैतिक पहचान का विकास
Answer: C) नैतिक तर्क का विकास

ईमानदारी से कहूँ तो, इन प्रश्नों को हल करने के बाद आपको अपनी तैयारी का एक अच्छा अंदाजा लग गया होगा। अगर कुछ प्रश्न गलत हुए हैं, तो घबराइए मत! यही तो सीखने का मौका है। उन टॉपिक्स को फिर से पढ़िए और अपनी गलतियों से सीखिए।

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Frequently Asked Questions (SUPER TET)

कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत Super TET के CDP (Child Development and Pedagogy) सेक्शन का एक मूलभूत हिस्सा है। इस सिद्धांत से हर साल 2-4 प्रश्न सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से पूछे जाते हैं। ये प्रश्न अक्सर नैतिक दुविधाओं पर आधारित होते हैं, जहाँ आपको बच्चे की नैतिक तर्कशक्ति की अवस्था को पहचानना होता है। इस टॉपिक को समझने से न केवल आपको सीधे अंक मिलते हैं, बल्कि यह बाल मनोविज्ञान की आपकी समग्र समझ को भी मजबूत करता है, जो शिक्षण से जुड़े अन्य प्रश्नों को हल करने में भी सहायक होता है। इसलिए, इसे अच्छे से तैयार करना आपकी सफलता के लिए बहुत जरूरी है।

कोहलबर्ग ने नैतिक विकास के सिद्धांत को तीन मुख्य स्तरों (Levels) और प्रत्येक स्तर में दो-दो अवस्थाओं (Stages) में बांटा है, कुल मिलाकर छह अवस्थाएँ हैं। पहला स्तर 'पूर्व-पारंपरिक नैतिकता' (Pre-conventional Morality) है, जिसमें 'दंड और आज्ञाकारिता' तथा 'वैयक्तिक और विनिमय' अवस्थाएँ आती हैं। दूसरा स्तर 'पारंपरिक नैतिकता' (Conventional Morality) है, जिसमें 'अच्छे अंतर्वैयक्तिक संबंध' और 'कानून और व्यवस्था' अवस्थाएँ शामिल हैं। अंत में, तीसरा स्तर 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) है, जिसमें 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' और 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' अवस्थाएँ होती हैं।

Super TET में Kohlberg के सिद्धांत से संबंधित प्रश्नों की तैयारी के लिए सबसे पहले हर स्तर और अवस्था की विशेषताओं को उदाहरणों के साथ समझें। रटने के बजाय कॉन्सेप्ट पर ध्यान दें। 'Heinz Dilemma' जैसे नैतिक दुविधाओं के उदाहरणों को समझें और उन पर विभिन्न अवस्थाओं के बच्चों की संभावित प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करें। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों (PYQs) को हल करें और देखें कि प्रश्न किस प्रकार पूछे जाते हैं। Unictest के मॉक टेस्ट और प्रैक्टिस सेट से नियमित अभ्यास करें, खासकर उन प्रश्नों का जो किसी परिदृश्य पर आधारित हों। अपनी गलतियों का विश्लेषण करें और कमजोर क्षेत्रों पर काम करें।

हाँ, कोहलबर्ग के नैतिक विकास सिद्धांत की कई मनोवैज्ञानिकों ने आलोचना की है। सबसे प्रमुख आलोचना कैरोल गिलिगन (Carol Gilligan) ने की है, जिन्होंने कहा कि कोहलबर्ग का सिद्धांत पुरुषों के नैतिक तर्क पर अधिक केंद्रित है और महिलाओं के नैतिक तर्क (जो अक्सर देखभाल और संबंधों पर आधारित होता है) को कम आंकता है। गिलिगन का तर्क था कि यह सिद्धांत लिंग-पक्षपाती (gender-biased) है। इसके अलावा, कुछ आलोचकों ने कहा कि यह सिद्धांत सांस्कृतिक रूप से पक्षपातपूर्ण है और गैर-पश्चिमी संस्कृतियों में सार्वभौमिक रूप से लागू नहीं होता है, क्योंकि नैतिक तर्क सांस्कृतिक संदर्भों से भी प्रभावित होता है।

Super TET के CDP सेक्शन में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए कोहलबर्ग के अलावा कई अन्य सिद्धांत भी महत्वपूर्ण हैं। जीन पियाजे (Jean Piaget) का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत, लेव वायगोत्स्की (Lev Vygotsky) का सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत, एरिक एरिकसन (Erik Erikson) का मनोसमाजिक विकास सिद्धांत, और बी.एफ. स्किनर (B.F. Skinner), इवान पावलोव (Ivan Pavlov) तथा एडवर्ड थोर्नडाइक (Edward Thorndike) के अधिगम के सिद्धांत बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ ही, बाल-केंद्रित शिक्षा, प्रगतिशील शिक्षा, समावेशी शिक्षा, अधिगम अक्षमताएँ (Learning Disabilities) और मूल्यांकन (Evaluation) जैसे टॉपिक्स पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। इन सभी टॉपिक्स को Unictest पर विस्तार से कवर किया गया है।

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