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Study Notes

Sanskrit Sarvanam Table with Hindi Meaning (संस्कृत सर्वनाम तालिका हिंदी अर्थ सहित)

Learn and Master Sanskrit Pronouns for UPTET 2026 Exam (यूपीटेट 2026 परीक्षा के लिए संस्कृत सर्वनाम सीखें और उनमें महारत हासिल करें)

Practice Questions
Author

Unictest Team

Updated: 2026-04-20 · English

Sanskrit Sarvanam Table with Hindi Meaning (संस्कृत सर्वनाम तालिका हिंदी अर्थ सहित)

यूपीटेट (UPTET) परीक्षा में संस्कृत भाषा का एक महत्वपूर्ण स्थान है, और इस खंड में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए व्याकरण की गहरी समझ आवश्यक है। संस्कृत व्याकरण के मुख्य घटकों में से एक 'सर्वनाम' (Pronouns) हैं। सर्वनाम शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं, जिससे भाषा में पुनरावृत्ति से बचा जा सके और वाक्य अधिक सुंदर व स्पष्ट बन सकें। इस लेख में, हम संस्कृत सर्वनामों, उनके प्रकारों और हिंदी अर्थ सहित उनकी तालिका (table) पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जो आपको UPTET 2026 परीक्षा की तैयारी में अत्यधिक सहायक सिद्ध होगा।


संस्कृत में सर्वनाम क्या है? (What is Sarvanam in Sanskrit?)

संस्कृत में, सर्वनाम उन शब्दों को कहते हैं जो किसी संज्ञा (नाम) के स्थान पर प्रयोग होते हैं। ये शब्द लिंग (gender), वचन (number) और कारक (case) के अनुसार बदलते रहते हैं। उदाहरण के लिए, 'राम पढ़ता है।' में 'राम' संज्ञा है। यदि हम कहें 'वह पढ़ता है।', तो 'वह' सर्वनाम है जो 'राम' के स्थान पर आया है। संस्कृत में सर्वनामों का सही प्रयोग वाक्यों को शुद्ध और प्रभावी बनाता है। UPTET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सर्वनामों के विभिन्न रूपों और उनके अर्थों को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।


सर्वनाम के प्रकार (Types of Sarvanam)

संस्कृत व्याकरण में मुख्य रूप से छह प्रकार के सर्वनाम होते हैं, जो हिंदी के समान ही हैं। इन्हें समझना आपके लिए काफी आसान होगा:

  • पुरुषवाचक सर्वनाम (Personal Pronouns): ये बोलने वाले, सुनने वाले या जिसके बारे में बात की जा रही है, उसका बोध कराते हैं। जैसे - अहम् (मैं), त्वम् (तुम), सः (वह)।
  • निश्चयवाचक सर्वनाम (Demonstrative Pronouns): ये किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करते हैं। जैसे - एषः (यह), सः (वह)।
  • अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Indefinite Pronouns): ये किसी अनिश्चित व्यक्ति या वस्तु का बोध कराते हैं। जैसे - कश्चित् (कोई), किञ्चित् (कुछ)।
  • प्रश्नवाचक सर्वनाम (Interrogative Pronouns): ये प्रश्न पूछने के लिए प्रयोग होते हैं। जैसे - कः (कौन), किम् (क्या)।
  • संबंधवाचक सर्वनाम (Relative Pronouns): ये एक वाक्य का दूसरे वाक्य से संबंध जोड़ते हैं। जैसे - यः (जो), सः (वह)।
  • निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronouns): ये कर्ता द्वारा स्वयं किए गए कार्य का बोध कराते हैं। जैसे - स्वयम् (स्वयं), आत्मना (अपने आप)।
ध्यान दें: UPTET परीक्षा में इन सभी प्रकारों से प्रश्न पूछे जाते हैं, खासकर पुरुषवाचक, निश्चयवाचक और प्रश्नवाचक सर्वनामों की तालिकाएँ (tables) बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। इन तालिकाओं को याद करने से आप विभक्ति और वचन संबंधी त्रुटियों से बच सकते हैं।

Important Topics Data

विभक्ति (Case)पुल्लिंग (Masculine) - एकवचनपुल्लिंग (Masculine) - द्विवचनपुल्लिंग (Masculine) - बहुवचनहिंदी अर्थ (Hindi Meaning)
प्रथमा (Nominative)सःतौतेवह, वे दोनों, वे सब
द्वितीया (Accusative)तम्तौतान्उसको, उन दोनों को, उन सबको
तृतीया (Instrumental)तेनताभ्याम्तैःउससे (के द्वारा), उन दोनों से, उन सब से
चतुर्थी (Dative)तस्मैताभ्याम्तेभ्यःउसके लिए, उन दोनों के लिए, उन सबके लिए
पंचमी (Ablative)तस्मात्ताभ्याम्तेभ्यःउससे (अलग होने पर), उन दोनों से, उन सब से
षष्ठी (Genitive)तस्यतयोःतेषाम्उसका/की/के, उन दोनों का/की/के, उन सबका/की/के
सप्तमी (Locative)तस्मिन्तयोःतेषुउसमें/पर, उन दोनों में/पर, उन सब में/पर
(संबोधन)(नहीं होता)(नहीं होता)(नहीं होता)(सर्वनामों का संबोधन नहीं होता)

विभक्ति (Case)स्त्रीलिंग (Feminine) - एकवचनस्त्रीलिंग (Feminine) - द्विवचनस्त्रीलिंग (Feminine) - बहुवचनहिंदी अर्थ (Hindi Meaning)
प्रथमा (Nominative)सातेताःवह, वे दोनों, वे सब
द्वितीया (Accusative)ताम्तेताःउसको, उन दोनों को, उन सबको
तृतीया (Instrumental)तयाताभ्याम्ताभिःउससे (के द्वारा), उन दोनों से, उन सब से
चतुर्थी (Dative)तस्यैताभ्याम्ताभ्यःउसके लिए, उन दोनों के लिए, उन सबके लिए
पंचमी (Ablative)तस्याःताभ्याम्ताभ्यःउससे (अलग होने पर), उन दोनों से, उन सब से
षष्ठी (Genitive)तस्याःतयोःतासाम्उसका/की/के, उन दोनों का/की/के, उन सबका/की/के
सप्तमी (Locative)तस्याम्तयोःतासुउसमें/पर, उन दोनों में/पर, उन सब में/पर
(संबोधन)(नहीं होता)(नहीं होता)(नहीं होता)(सर्वनामों का संबोधन नहीं होता)

Detailed Notes

महत्वपूर्ण संस्कृत सर्वनाम तालिकाएँ और उनके हिंदी अर्थ (Important Sanskrit Sarvanam Tables with Hindi Meaning)

संस्कृत सर्वनामों के रूप तीनों लिंगों (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग) और सातों विभक्तियों (cases) तथा तीनों वचनों (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) में भिन्न-भिन्न होते हैं। UPTET परीक्षा के लिए कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण सर्वनामों की तालिकाएँ समझना और याद करना आवश्यक है। इनमें 'तद्' (वह), 'एतद्' (यह), 'किम्' (क्या/कौन), 'युष्मद्' (तुम) और 'अस्मद्' (मैं) प्रमुख हैं। इन तालिकाओं को याद करने से आपको वाक्य रचना और अनुवाद में बहुत मदद मिलेगी।


विभक्ति और वचन का महत्व (Importance of Vibhakti and Vachan)

सर्वनामों के रूपों को समझने के लिए विभक्ति और वचन की अवधारणा को जानना आवश्यक है:

  • विभक्तियाँ (Cases): ये शब्दों का क्रिया या अन्य शब्दों से संबंध दर्शाती हैं। संस्कृत में सात मुख्य विभक्तियाँ होती हैं - प्रथमा (कर्ता), द्वितीया (कर्म), तृतीया (करण), चतुर्थी (संप्रदान), पंचमी (अपादान), षष्ठी (संबंध), सप्तमी (अधिकरण)।
  • वचन (Numbers): संस्कृत में तीन वचन होते हैं - एकवचन (एक के लिए), द्विवचन (दो के लिए), बहुवचन (दो से अधिक के लिए)।

इन दोनों कारकों के आधार पर ही सर्वनाम के रूप बदलते हैं। उदाहरण के लिए, 'तद्' सर्वनाम का पुल्लिंग प्रथमा एकवचन 'सः' (वह) होता है, जबकि स्त्रीलिंग प्रथमा एकवचन 'सा' (वह) और नपुंसकलिंग प्रथमा एकवचन 'तत्' (वह) होता है। इसी प्रकार, द्वितीया विभक्ति में 'तम्' (उसको), 'ताम्' (उसको) और 'तत्' (उसको) रूप बनते हैं। इन बारीकियों को समझना UPTET के लिए बहुत जरूरी है।


UPTET संस्कृत व्याकरण के लिए तैयारी के टिप्स (UPTET Sanskrit Grammar Preparation Tips)

  • नियमित अभ्यास: सर्वनाम तालिकाओं को प्रतिदिन पढ़ें और लिखें।
  • फ्लैशकार्ड्स का प्रयोग: महत्वपूर्ण सर्वनामों और उनके रूपों के फ्लैशकार्ड्स बनाएं।
  • उदाहरणों पर ध्यान दें: प्रत्येक सर्वनाम के प्रयोग को वाक्यों में देखें ताकि उनका अर्थ स्पष्ट हो सके।
  • पिछले वर्षों के प्रश्न: UPTET के पिछले वर्षों के संस्कृत व्याकरण के प्रश्नों को हल करें, खासकर सर्वनाम से संबंधित।
  • सही उच्चारण: संस्कृत शब्दों का सही उच्चारण करने से उन्हें याद रखने में मदद मिलती है।

Important Questions & Tips

UPTET संस्कृत में सर्वनाम संबंधी सामान्य त्रुटियाँ और उनसे कैसे बचें (Common Mistakes in UPTET Sanskrit Sarvanam and How to Avoid Them)

UPTET परीक्षा में कई अभ्यर्थी सर्वनामों के प्रयोग में कुछ सामान्य गलतियाँ करते हैं। इन गलतियों से बचने के लिए सावधानीपूर्वक अध्ययन और अभ्यास आवश्यक है:

  • लिंग भेद में त्रुटि: 'तद्' जैसे सर्वनामों का प्रयोग करते समय पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग रूपों को सही ढंग से न पहचान पाना।
  • विभक्ति का गलत प्रयोग: वाक्य में अपेक्षित कारक के अनुसार सही विभक्ति का प्रयोग न करना। उदाहरण के लिए, कर्ता के स्थान पर कर्म विभक्ति का प्रयोग।
  • वचन की गलती: एकवचन, द्विवचन या बहुवचन के रूपों को गलत तरीके से प्रयोग करना।
  • 'एतद्' और 'तद्' में भ्रम: 'यह' (एतद्) और 'वह' (तद्) के रूपों में अंतर न समझ पाना।
बचने के उपाय: इन त्रुटियों से बचने के लिए, प्रत्येक सर्वनाम तालिका को लिंग, वचन और विभक्ति के साथ अलग-अलग याद करें। संस्कृत वाक्य रचना का अधिक से अधिक अभ्यास करें और अपने उत्तरों की किसी विशेषज्ञ से जाँच करवाएं।

UPTET के लिए संस्कृत सर्वनाम सीखने के संसाधन (Resources for Learning Sanskrit Sarvanam for UPTET)

Unictest आपको UPTET संस्कृत की तैयारी के लिए व्यापक अध्ययन सामग्री प्रदान करता है। हमारी वेबसाइट पर आपको विस्तृत नोट्स, अभ्यास प्रश्न और मॉक टेस्ट मिलेंगे जो सर्वनामों को समझने और उनमें महारत हासिल करने में आपकी सहायता करेंगे। इसके अतिरिक्त, आप अपनी पाठ्यपुस्तकों और विश्वसनीय ऑनलाइन स्रोतों का भी उपयोग कर सकते हैं। नियमित अभ्यास और सही मार्गदर्शन से आप निश्चित रूप से संस्कृत खंड में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पाएंगे।

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Frequently Asked Questions (UPTET)

संस्कृत में सर्वनाम वे शब्द हैं जो संज्ञा (नाम) के स्थान पर प्रयोग होते हैं, जैसे 'वह', 'तुम', 'मैं'। UPTET परीक्षा के लिए ये महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनसे वाक्य संरचना, अनुवाद और व्याकरण संबंधी शुद्धता का ज्ञान परखा जाता है। इनकी सही समझ से आप अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं और भाषा की गहरी पकड़ दर्शा सकते हैं।

संस्कृत व्याकरण में सर्वनाम के मुख्य छह प्रकार होते हैं: पुरुषवाचक (Personal), निश्चयवाचक (Demonstrative), अनिश्चयवाचक (Indefinite), प्रश्नवाचक (Interrogative), संबंधवाचक (Relative) और निजवाचक (Reflexive) सर्वनाम। इन सभी प्रकारों को समझना और उनके उदाहरणों को जानना UPTET के लिए आवश्यक है।

UPTET के लिए 'तद्' (वह), 'एतद्' (यह), 'किम्' (क्या/कौन), 'युष्मद्' (तुम) और 'अस्मद्' (मैं) सर्वनामों की तालिकाएँ सबसे महत्वपूर्ण हैं। इन सर्वनामों के रूप तीनों लिंगों, वचनों और विभक्तियों में याद करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इनसे सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।

सर्वनाम तालिकाओं को याद करने के लिए नियमित अभ्यास सबसे प्रभावी तरीका है। आप उन्हें प्रतिदिन लिखें, फ्लैशकार्ड्स का उपयोग करें, और प्रत्येक रूप का हिंदी अर्थ समझें। वाक्यों में उनके प्रयोग को देखकर अभ्यास करने से भी याददाश्त मजबूत होती है। पिछले वर्षों के प्रश्नों को हल करना भी बहुत सहायक होता है।

संस्कृत सर्वनामों के रूप लिंग (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग), वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) और कारक (विभक्ति) के अनुसार बदलते हैं। उदाहरण के लिए, 'तद्' (वह) का पुल्लिंग में 'सः', स्त्रीलिंग में 'सा' और नपुंसकलिंग में 'तत्' रूप प्रथमा एकवचन में होता है। प्रत्येक विभक्ति में भी इनके रूप अलग-अलग होते हैं, जो वाक्य में उनके कार्य के अनुसार निर्धारित होते हैं।

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