Unictest FREE APP Download Unictest App — Free Mock Tests, PYQs & Notes for 375+ Exams! Unictest App — Free Mock Tests & PYQs! Get it on Google Play
Study Notes

Ivan Pavlov Classical Conditioning Notes for UPTET Exam 2026 | इवान पावलोव शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत UPTET 2026

Unraveling Pavlov's Classical Conditioning: Essential Notes for UPTET & Teaching Exams | पावलोव का शास्त्रीय अनुबंधन: UPTET और शिक्षण परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण नोट्स

Practice Questions
Author

Unictest Team

Updated: 2026-04-20 · English

Ivan Pavlov Classical Conditioning Notes for UPTET Exam 2026 | इवान पावलोव शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत UPTET 2026

शिक्षण परीक्षाओं, विशेषकर UPTET, की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए 'इवान पावलोव का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Ivan Pavlov's Classical Conditioning Theory) एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। बाल विकास और शिक्षाशास्त्र (Child Development and Pedagogy - CDP) खंड में इस सिद्धांत से अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं। यह सिद्धांत सीखने के व्यवहारवादी दृष्टिकोण (Behaviorist perspective of learning) की नींव में से एक है और यह समझने में मदद करता है कि कैसे प्राणी उद्दीपकों (stimuli) के बीच संबंध स्थापित करके सीखते हैं।

इवान पावलोव और शास्त्रीय अनुबंधन का परिचय

इवान पावलोव (Ivan Pavlov) एक रूसी शरीर विज्ञानी (Physiologist) थे जिन्हें उनके पाचन तंत्र पर शोध के लिए 1904 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। अपने शोध के दौरान, उन्होंने आकस्मिक रूप से एक ऐसी घटना का अवलोकन किया जिसने मनोविज्ञान के क्षेत्र में क्रांति ला दी। उन्होंने देखा कि कुत्ते भोजन मिलने से पहले ही, भोजन लाने वाले व्यक्ति या घंटी की आवाज़ सुनकर लार टपकाना शुरू कर देते थे। इस अवलोकन ने उन्हें 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) नामक सीखने के सिद्धांत को विकसित करने के लिए प्रेरित किया। इस सिद्धांत को 'पावलोवियन कंडीशनिंग' या 'प्रतिवादी अनुबंधन' (Respondent Conditioning) भी कहा जाता है।

पावलोव का प्रसिद्ध प्रयोग: कुत्ते और घंटी

पावलोव ने अपने सिद्धांत को समझाने के लिए कुत्तों पर एक नियंत्रित प्रयोग किया। इस प्रयोग में मुख्य रूप से चार घटक शामिल थे:

  • 1. अनानुबंधित उद्दीपक (Unconditioned Stimulus - UCS): यह वह उद्दीपक होता है जो स्वाभाविक रूप से, बिना किसी पूर्व सीखने के, एक प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। पावलोव के प्रयोग में, भोजन (Food) UCS था। भोजन देखकर कुत्ते स्वाभाविक रूप से लार टपकाते हैं।
  • 2. अनानुबंधित अनुक्रिया (Unconditioned Response - UCR): यह UCS के प्रति स्वाभाविक और बिना सीखी हुई प्रतिक्रिया होती है। पावलोव के प्रयोग में, भोजन देखकर लार टपकाना (Salivation to food) UCR था।
  • 3. तटस्थ उद्दीपक (Neutral Stimulus - NS): यह वह उद्दीपक होता है जो अनुबंधन से पहले कोई विशिष्ट प्रतिक्रिया उत्पन्न नहीं करता। पावलोव के प्रयोग में, घंटी की आवाज़ (Bell sound) NS थी। शुरुआत में, घंटी की आवाज़ सुनकर कुत्ते लार नहीं टपकाते थे।
  • 4. अनुबंधित उद्दीपक (Conditioned Stimulus - CS): यह वह तटस्थ उद्दीपक होता है जिसे UCS के साथ बार-बार प्रस्तुत करने के बाद, वह अकेले ही UCR जैसी प्रतिक्रिया उत्पन्न करने में सक्षम हो जाता है। पावलोव के प्रयोग में, घंटी की आवाज़ (Bell sound) CS बन गई।
  • 5. अनुबंधित अनुक्रिया (Conditioned Response - CR): यह CS के प्रति सीखी हुई प्रतिक्रिया होती है, जो UCR के समान होती है लेकिन CS द्वारा उत्पन्न होती है। पावलोव के प्रयोग में, घंटी की आवाज़ सुनकर लार टपकाना (Salivation to bell) CR था।

प्रयोग की प्रक्रिया (Process of the Experiment):

  1. पूर्व-अनुबंधन (Before Conditioning):
    • UCS (भोजन) → UCR (लार)
    • NS (घंटी) → कोई लार नहीं
  2. अनुबंधन के दौरान (During Conditioning):
    • NS (घंटी) + UCS (भोजन) को एक साथ बार-बार प्रस्तुत किया गया।
    • इस जोड़ीकरण से UCR (लार) उत्पन्न होती रही।
  3. अनुबंधन के बाद (After Conditioning):
    • CS (घंटी) अकेले ही CR (लार) उत्पन्न करने लगी।
Note: शास्त्रीय अनुबंधन में, सीखने की प्रक्रिया तब होती है जब एक तटस्थ उद्दीपक (जैसे घंटी) को एक अनानुबंधित उद्दीपक (जैसे भोजन) के साथ बार-बार जोड़ा जाता है, जिससे तटस्थ उद्दीपक भी वही प्रतिक्रिया उत्पन्न करने लगता है जो अनानुबंधित उद्दीपक करता था। यह UPTET के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है।

Important Topics Data

अवधारणा (Concept)परिभाषा (Definition)पावलोव के प्रयोग का उदाहरण (Example from Pavlov's Experiment)
अनानुबंधित उद्दीपक (UCS)वह उद्दीपक जो स्वाभाविक रूप से, बिना किसी सीख के, एक अनुक्रिया उत्पन्न करता है।भोजन (Food)
अनानुबंधित अनुक्रिया (UCR)UCS के प्रति स्वाभाविक और बिना सीखी हुई प्रतिक्रिया।भोजन देखकर लार टपकाना (Salivation to food)
तटस्थ उद्दीपक (NS)वह उद्दीपक जो अनुबंधन से पहले कोई विशिष्ट प्रतिक्रिया उत्पन्न नहीं करता।घंटी की आवाज़ (Bell sound)
अनुबंधित उद्दीपक (CS)वह तटस्थ उद्दीपक जिसे UCS के साथ बार-बार प्रस्तुत करने के बाद, अकेले ही UCR जैसी प्रतिक्रिया उत्पन्न करने में सक्षम हो जाता है।घंटी की आवाज़ (Bell sound) (भोजन के साथ युग्मन के बाद)
अनुबंधित अनुक्रिया (CR)CS के प्रति सीखी हुई प्रतिक्रिया, जो UCR के समान होती है लेकिन CS द्वारा उत्पन्न होती है।घंटी की आवाज़ सुनकर लार टपकाना (Salivation to bell)

Detailed Notes

शास्त्रीय अनुबंधन के प्रमुख सिद्धांत और अवधारणाएँ (Key Principles and Concepts)

पावलोव के सिद्धांत में कई महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं जो सीखने की प्रक्रिया को और अधिक स्पष्ट करती हैं:

  • 1. अधिग्रहण (Acquisition): यह अनुबंधन की प्रारंभिक अवस्था है जहाँ CS और UCS को बार-बार जोड़ा जाता है, जिससे CR धीरे-धीरे स्थापित और मजबूत होती है। यह वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से एक नया व्यवहार सीखा जाता है। UPTET में इस पर आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
  • 2. विलोपन या विस्मरण (Extinction): यदि CS (घंटी) को UCS (भोजन) के बिना बार-बार प्रस्तुत किया जाए, तो CR (लार टपकाना) धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है और अंततः गायब हो जाती है। इसे विलोपन कहते हैं।
  • 3. स्वतः पुनर्लाभ (Spontaneous Recovery): विलोपन के बाद, यदि कुछ समय के लिए CS को प्रस्तुत न किया जाए, और फिर अचानक इसे फिर से प्रस्तुत किया जाए, तो CR (लार) का फिर से प्रकट होना स्वतः पुनर्लाभ कहलाता है। यह दर्शाता है कि सीखा हुआ व्यवहार पूरी तरह से मिटता नहीं है, बल्कि दबा दिया जाता है।
  • 4. उद्दीपक सामान्यीकरण (Stimulus Generalization): एक बार जब एक प्राणी एक विशिष्ट CS के प्रति अनुबंधित हो जाता है, तो वह उस CS के समान अन्य उद्दीपकों के प्रति भी वैसी ही अनुक्रिया कर सकता है। उदाहरण के लिए, यदि एक बच्चा किसी एक विशेष प्रकार की घंटी की आवाज़ पर प्रतिक्रिया करना सीखता है, तो वह समान ध्वनि वाली अन्य घंटियों पर भी प्रतिक्रिया कर सकता है।
  • 5. उद्दीपक विभेदन (Stimulus Discrimination): यह सामान्यीकरण के विपरीत है। इसमें प्राणी CS और अन्य समान उद्दीपकों के बीच अंतर करना सीखता है, और केवल CS के प्रति ही अनुक्रिया करता है। उदाहरण के लिए, कुत्ता केवल उस विशिष्ट घंटी की आवाज़ पर लार टपकाएगा जिसे भोजन के साथ जोड़ा गया था, न कि किसी अन्य प्रकार की घंटी की आवाज़ पर।

शैक्षिक निहितार्थ और अनुप्रयोग (Educational Implications and Applications)

पावलोव का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत शिक्षकों और शिक्षाशास्त्रियों के लिए कई महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है:

  • 1. सकारात्मक कक्षा वातावरण का निर्माण (Creating Positive Classroom Environment): शिक्षक इस सिद्धांत का उपयोग करके सीखने के प्रति सकारात्मक भावनाएँ उत्पन्न कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी विषय (NS) को सफल अनुभव (UCS) के साथ जोड़ा जाए, तो छात्र उस विषय के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण (CR) विकसित कर सकते हैं।
  • 2. भय और चिंता को कम करना (Reducing Fear and Anxiety): शास्त्रीय अनुबंधन का उपयोग छात्रों में स्कूल, परीक्षा या किसी विशिष्ट विषय के प्रति उत्पन्न होने वाले भय और चिंता को दूर करने के लिए किया जा सकता है। धीरे-धीरे सकारात्मक अनुभवों के साथ भयभीत उद्दीपक को जोड़कर नकारात्मक प्रतिक्रियाओं को कम किया जा सकता है।
  • 3. आदत निर्माण (Habit Formation): अच्छी आदतों (जैसे समय पर गृहकार्य करना, अनुशासन बनाए रखना) को स्थापित करने और बुरी आदतों को तोड़ने में यह सिद्धांत उपयोगी है। लगातार सकारात्मक सुदृढीकरण (positive reinforcement) से वांछित व्यवहार को अनुबंधित किया जा सकता है।
  • 4. व्यवहार प्रबंधन (Behavior Management): क्लासरूम में अवांछित व्यवहारों को समझने और उन्हें संशोधित करने में मदद करता है। यदि कोई बच्चा किसी विशेष स्थिति (CS) में नकारात्मक व्यवहार (CR) करता है, तो उस स्थिति को सकारात्मक अनुभवों (UCS) के साथ जोड़कर व्यवहार को बदला जा सकता है।
  • 5. भावनात्मक प्रतिक्रियाएं (Emotional Responses): बच्चे अक्सर कुछ शब्दों, प्रतीकों या स्थितियों के प्रति भावनात्मक प्रतिक्रियाएं विकसित कर लेते हैं। शिक्षक इन अनुबंधित भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को समझने और उन्हें प्रबंधित करने में शास्त्रीय अनुबंधन का उपयोग कर सकते हैं।
UPTET Perspective: UPTET परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है कि 'एक शिक्षक कक्षा में शास्त्रीय अनुबंधन का उपयोग कैसे कर सकता है?' या 'निम्नलिखित में से कौन सा शास्त्रीय अनुबंधन का उदाहरण है?' इन अनुप्रयोगों को समझना आपको ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में मदद करेगा।

Important Questions & Tips

UPTET परीक्षा के लिए शास्त्रीय अनुबंधन की तैयारी कैसे करें?

UPTET की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए इवान पावलोव का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत बाल विकास और शिक्षाशास्त्र खंड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस विषय को प्रभावी ढंग से तैयार करने के लिए कुछ सुझाव यहाँ दिए गए हैं:

  • 1. मूल अवधारणाओं को समझें: UCS, UCR, NS, CS, CR की परिभाषाओं और उदाहरणों को अच्छी तरह से समझें। इन शब्दों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से जानना महत्वपूर्ण है।
  • 2. प्रमुख सिद्धांतों पर ध्यान दें: अधिग्रहण, विलोपन, स्वतः पुनर्लाभ, सामान्यीकरण और विभेदन जैसे सिद्धांतों को उनके अर्थ और शैक्षिक निहितार्थों के साथ याद रखें।
  • 3. उदाहरणों के साथ अभ्यास करें: विभिन्न स्थितियों में शास्त्रीय अनुबंधन के अनुप्रयोगों को समझने के लिए वास्तविक जीवन और शैक्षिक उदाहरणों का अभ्यास करें। यह आपको सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक प्रश्नों से जोड़ने में मदद करेगा।
  • 4. तुलनात्मक अध्ययन करें: शास्त्रीय अनुबंधन की तुलना अन्य सीखने के सिद्धांतों, जैसे स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन (Operant Conditioning) और थॉर्नडाइक के प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत (Trial and Error Theory) से करें। इन सिद्धांतों के बीच के अंतर और समानताओं को समझना आपकी अवधारणात्मक स्पष्टता को बढ़ाएगा।
  • 5. पिछले वर्षों के प्रश्न हल करें (PYQs): UPTET और अन्य TET परीक्षाओं में इस विषय से पूछे गए पिछले वर्षों के प्रश्नों को हल करें। यह आपको परीक्षा पैटर्न और महत्वपूर्ण क्षेत्रों को समझने में मदद करेगा। Unictest पर आपको ऐसे कई अभ्यास प्रश्न मिल जाएंगे।
  • 6. नोट्स बनाएं और संशोधित करें: अपने स्वयं के संक्षिप्त और स्पष्ट नोट्स बनाएं जिनमें मुख्य बिंदु, परिभाषाएं और उदाहरण शामिल हों। नियमित रूप से इन नोट्स को संशोधित करें।
महत्वपूर्ण चेतावनी: केवल रटने से बचें। UPTET परीक्षा में अक्सर अनुप्रयोग-आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं जहाँ आपको सिद्धांत को वास्तविक कक्षा स्थितियों में लागू करना होता है। इसलिए, प्रत्येक अवधारणा को गहराई से समझना महत्वपूर्ण है।

इवान पावलोव का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत मनोविज्ञान और शिक्षाशास्त्र दोनों में एक आधारभूत अवधारणा है। UPTET उम्मीदवारों के रूप में, इस सिद्धांत की स्पष्ट समझ होना आपको परीक्षा में सफलता प्राप्त करने में मदद करेगा। Unictest आपकी तैयारी को आसान बनाने के लिए विस्तृत अध्ययन सामग्री और अभ्यास प्रश्न प्रदान करता है।

🎯 Ready to Crack UPTET?

Start with a free mock test — No credit card required

Start Free Mock Test — It's Free!

Frequently Asked Questions (UPTET)

इवान पावलोव का शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत सीखने का एक व्यवहारवादी सिद्धांत है। यह बताता है कि कैसे एक तटस्थ उद्दीपक (जैसे घंटी) को एक स्वाभाविक उद्दीपक (जैसे भोजन) के साथ बार-बार जोड़े जाने पर, वह तटस्थ उद्दीपक भी स्वाभाविक उद्दीपक जैसी प्रतिक्रिया (जैसे लार टपकाना) उत्पन्न करने लगता है। इसे 'सीखने द्वारा साहचर्य' (learning by association) के रूप में भी जाना जाता है।

शास्त्रीय अनुबंधन के मुख्य घटकों में अनानुबंधित उद्दीपक (UCS), अनानुबंधित अनुक्रिया (UCR), तटस्थ उद्दीपक (NS), अनुबंधित उद्दीपक (CS) और अनुबंधित अनुक्रिया (CR) शामिल हैं। UPTET परीक्षा के लिए इन सभी घटकों की स्पष्ट समझ और उनके उदाहरण जानना महत्वपूर्ण है।

UPTET के लिए इस विषय की तैयारी के लिए, आपको मूल अवधारणाओं (UCS, CS आदि) को समझना चाहिए, प्रमुख सिद्धांतों (अधिग्रहण, विलोपन, सामान्यीकरण) पर ध्यान देना चाहिए, शैक्षिक निहितार्थों को जानना चाहिए, और पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) का अभ्यास करना चाहिए। Unictest पर उपलब्ध नोट्स और अभ्यास प्रश्न आपकी तैयारी में सहायक होंगे।

शास्त्रीय अनुबंधन के शैक्षिक निहितार्थों में सकारात्मक कक्षा वातावरण का निर्माण, छात्रों के भय और चिंता को कम करना, अच्छी आदतों का निर्माण, व्यवहार प्रबंधन और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को समझना शामिल है। शिक्षक इस सिद्धांत का उपयोग करके सीखने के अनुभवों को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

शास्त्रीय अनुबंधन में, सीखने वाला निष्क्रिय होता है और उद्दीपकों के बीच संबंध बनाता है (जैसे घंटी और भोजन)। जबकि क्रियाप्रसूत अनुबंधन में, सीखने वाला सक्रिय होता है और अपने व्यवहार के परिणामों (पुरस्कार या दंड) के आधार पर सीखता है। UPTET में इन दोनों सिद्धांतों के बीच अंतर को अक्सर पूछा जाता है।

UPTET Test Series

500+ Tests | PYQs | Detailed Solutions

Start Now