Unictest FREE APP Download Unictest App — Free Mock Tests, PYQs & Notes for 375+ Exams! Unictest App — Free Mock Tests & PYQs! Get it on Google Play
Study Notes

गुलाम वंश (Slave Dynasty) - दिल्ली सल्तनत का उदय और प्रमुख शासक | UPTET History

दिल्ली सल्तनत का पहला राजवंश: गुलाम वंश (Slave Dynasty) - UPTET परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

Practice Questions
Author

Unictest Team

Updated: 2026-04-20 · English

गुलाम वंश (Slave Dynasty) - दिल्ली सल्तनत का उदय और प्रमुख शासक | UPTET History

UPTET परीक्षा की तैयारी कर रहे सभी उम्मीदवारों के लिए भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण खंड है दिल्ली सल्तनत। इस सल्तनत की नींव रखने वाला पहला राजवंश गुलाम वंश (Slave Dynasty) था, जिसे मामलुक वंश (Mamluk Dynasty) के नाम से भी जाना जाता है। 'गुलाम' शब्द का अर्थ यहाँ दास या सैन्य दास से है, जो अपनी योग्यता और निष्ठा के बल पर शासक बने। यह वंश 1206 ईस्वी से 1290 ईस्वी तक चला और इसने भारतीय उपमहाद्वीप में तुर्की शासन की नींव रखी। UPTET जैसे शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में इस काल से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इसका गहन अध्ययन आवश्यक है।


गुलाम वंश का उदय और पृष्ठभूमि (Rise and Background of Slave Dynasty)

गुलाम वंश का उदय मोहम्मद गोरी (Muhammad Ghori) की मृत्यु के बाद हुआ। गोरी के कोई पुत्र नहीं था, इसलिए वह अपने विश्वसनीय और योग्य गुलामों को ही अपना उत्तराधिकारी मानता था। इनमें से एक प्रमुख गुलाम था कुतुबुद्दीन ऐबक (Qutb al-Din Aibak)। 1206 ईस्वी में मोहम्मद गोरी की मृत्यु के बाद, ऐबक ने लाहौर में खुद को स्वतंत्र शासक घोषित कर दिल्ली सल्तनत की स्थापना की। हालांकि, उसने सुल्तान की उपाधि धारण नहीं की और मलिक व सिपहसालार की उपाधियों से ही संतुष्ट रहा।


महत्वपूर्ण तथ्य (Important Fact): गुलाम वंश को 'मामलुक वंश' भी कहते हैं क्योंकि इसके शासक वास्तव में गुलाम थे लेकिन उन्हें उनके मालिकों द्वारा स्वतंत्र कर दिया गया था, और उन्होंने अपनी योग्यता से शासन स्थापित किया। 'मामलुक' अरबी शब्द है जिसका अर्थ 'स्वामित्व वाला' होता है।

गुलाम वंश के प्रमुख शासक (Key Rulers of the Slave Dynasty)

  • कुतुबुद्दीन ऐबक (Qutb al-Din Aibak) (1206-1210 ई.)
    यह गुलाम वंश का संस्थापक था। इसने दिल्ली में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और अजमेर में अढ़ाई दिन का झोंपड़ा बनवाया। प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की याद में इसने कुतुब मीनार का निर्माण कार्य शुरू करवाया। ऐबक को उसकी उदारता के कारण 'लाख बख्श' (लाखों का दान देने वाला) भी कहा जाता था। 1210 ईस्वी में चौगान (पोलो) खेलते हुए उसकी मृत्यु हो गई।
  • शम्सुद्दीन इल्तुतमिश (Shamsuddin Iltutmish) (1211-1236 ई.)
    ऐबक की मृत्यु के बाद उसका अयोग्य पुत्र आरामशाह गद्दी पर बैठा, जिसे हटाकर ऐबक का दामाद और गुलाम इल्तुतमिश शासक बना। इल्तुतमिश को दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। उसने लाहौर से राजधानी दिल्ली स्थानांतरित की। उसने 'चालीस तुर्की सरदारों' का एक समूह 'तुर्कान-ए-चहलगानी' या 'चालीसा' का गठन किया। इल्तुतमिश ने इक्ता प्रणाली (Iqta System) की शुरुआत की, जिसमें अधिकारियों को वेतन के बदले भूमि दी जाती थी। उसने चांदी का टंका और तांबे का जीतल नामक सिक्के चलाए। उसने कुतुब मीनार का निर्माण कार्य पूरा करवाया।
  • रजिया सुल्तान (Razia Sultan) (1236-1240 ई.)
    इल्तुतमिश ने अपनी पुत्री रजिया को अपना उत्तराधिकारी चुना था, जो दिल्ली सल्तनत की पहली और एकमात्र महिला मुस्लिम शासिका थी। रजिया ने पुरुषों के वस्त्र धारण कर शासन का कार्य संभाला, जिससे तुर्की अमीर उससे नाखुश थे। उसे अपने शासनकाल में कई विद्रोहों का सामना करना पड़ा और अंततः उसे अपदस्थ कर मार दिया गया।
  • गयासुद्दीन बलबन (Ghiyas ud din Balban) (1266-1287 ई.)
    रजिया के बाद कुछ कमजोर शासक आए, जिसके बाद इल्तुतमिश के गुलाम बलबन ने सत्ता संभाली। बलबन ने 'लौह एवं रक्त की नीति' (Policy of Blood and Iron) अपनाई। उसने तुर्कान-ए-चहलगानी को समाप्त किया और सुल्तान की प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित किया। उसने 'सिजदा' (झुककर सलाम करना) और 'पैबोस' (सुल्तान के पैर चूमना) जैसी ईरानी परंपराएं शुरू कीं। बलबन ने एक मजबूत गुप्तचर प्रणाली (Spy System) भी स्थापित की। उसका मानना था कि राजा ईश्वर का प्रतिनिधि (नियाबत-ए-खुदाई) होता है।

Important Topics Data

शासक (Ruler)शासनकाल (Reign)प्रमुख योगदान (Key Contributions)
कुतुबुद्दीन ऐबक1206-1210 ई.गुलाम वंश का संस्थापक, कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण, कुतुब मीनार का आरंभ, 'लाख बख्श' की उपाधि।
शम्सुद्दीन इल्तुतमिश1211-1236 ई.दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक, राजधानी दिल्ली स्थानांतरित, इक्ता प्रणाली की शुरुआत, तुर्कान-ए-चहलगानी का गठन, कुतुब मीनार का निर्माण पूर्ण करवाया।
रजिया सुल्तान1236-1240 ई.दिल्ली सल्तनत की पहली और एकमात्र महिला मुस्लिम शासिका, पुरुषों के वेश में शासन।
गयासुद्दीन बलबन1266-1287 ई.'लौह एवं रक्त की नीति', तुर्कान-ए-चहलगानी का अंत, सिजदा और पैबोस की प्रथा शुरू, गुप्तचर प्रणाली का गठन, 'नियाबत-ए-खुदाई' की उपाधि।
कैकूबाद1287-1290 ई.बलबन का पौत्र, अंतिम महत्वपूर्ण गुलाम शासक, इसके बाद खिलजी वंश की स्थापना हुई।

Detailed Notes

गुलाम वंश का प्रशासन और समाज (Administration and Society of Slave Dynasty)

गुलाम वंश के शासकों ने दिल्ली सल्तनत को एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा प्रदान किया। इल्तुतमिश द्वारा शुरू की गई इक्ता प्रणाली ने राजस्व संग्रह और सैन्य संगठन को व्यवस्थित किया। प्रशासन में तुर्की अमीरों और गुलामों का महत्वपूर्ण स्थान था। शहरीकरण को बढ़ावा मिला और दिल्ली एक प्रमुख राजनीतिक व सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरी। फारसी भाषा को राजभाषा का दर्जा मिला और कई फारसी विद्वानों को संरक्षण मिला। समाज में धार्मिक सहिष्णुता के उदाहरण भी मिलते हैं, हालांकि शासकों का मुख्य उद्देश्य अपनी सत्ता को मजबूत करना था।


गुलाम वंश का पतन और महत्व (Decline and Significance of Slave Dynasty)

बलबन की मृत्यु के बाद गुलाम वंश में कोई भी योग्य शासक नहीं हुआ। उसके उत्तराधिकारी कैकूबाद (Kaiqubad) और क्यूमर्स (Kayumars) जैसे कमजोर शासक थे, जो अमीरों के हाथों की कठपुतली बन गए। इस दौरान, जलालुद्दीन फिरोज खिलजी (Jalaluddin Firuz Khalji) नामक एक सेनापति ने सत्ता पर कब्जा कर लिया और 1290 ईस्वी में गुलाम वंश का अंत कर खिलजी वंश (Khalji Dynasty) की स्थापना की। इसे 'खिलजी क्रांति' के नाम से जाना जाता है, जिसने दिल्ली सल्तनत में एक नए युग की शुरुआत की।


यूपीटेट परीक्षा के लिए महत्व (Importance for UPTET Exam): गुलाम वंश दिल्ली सल्तनत का संस्थापक वंश होने के कारण UPTET इतिहास के सिलेबस का एक अनिवार्य हिस्सा है। इससे शासकों के नाम, उनके महत्वपूर्ण कार्य (जैसे कुतुब मीनार का निर्माण, इक्ता प्रणाली, चालीसा का गठन), प्रमुख नीतियां (जैसे बलबन की लौह एवं रक्त की नीति) और महत्वपूर्ण उपाधियाँ (जैसे लाख बख्श) से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। आपको इन सभी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

UPTET इतिहास की तैयारी के लिए टिप्स (Tips for UPTET History Preparation)

  • कालानुक्रमिक अध्ययन (Chronological Study): घटनाओं और शासकों को उनके सही कालक्रम में याद रखें।
  • प्रमुख तथ्यों पर ध्यान (Focus on Key Facts): शासकों के विशिष्ट योगदान, प्रशासनिक सुधार और स्थापत्य कला पर विशेष ध्यान दें।
  • नियमित रिवीजन (Regular Revision): महत्वपूर्ण तिथियों, नामों और घटनाओं का नियमित रूप से रिवीजन करें।
  • पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र (Previous Year Papers): UPTET के पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का अभ्यास करें ताकि आपको प्रश्नों के पैटर्न और महत्व का पता चल सके।
  • मानचित्रों का उपयोग (Use of Maps): दिल्ली सल्तनत के विस्तार और महत्वपूर्ण शहरों को समझने के लिए ऐतिहासिक मानचित्रों का उपयोग करें।

Unictest आपको UPTET और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाली अध्ययन सामग्री प्रदान करता है। हमारे मॉक टेस्ट और प्रैक्टिस सेट के माध्यम से आप अपनी तैयारी को और मजबूत कर सकते हैं।

Important Questions & Tips

गुलाम वंश के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु (Some Important Points of Slave Dynasty)

  • स्थापना: 1206 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा।
  • राजधानी: शुरुआत में लाहौर, बाद में इल्तुतमिश द्वारा दिल्ली स्थानांतरित।
  • प्रसिद्ध शासक: कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश, रजिया सुल्तान, बलबन।
  • प्रमुख प्रशासनिक सुधार: इक्ता प्रणाली, तुर्कान-ए-चहलगानी (बाद में बलबन द्वारा समाप्त)।
  • स्थापत्य कला: कुतुब मीनार, कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, अढ़ाई दिन का झोंपड़ा।
  • पतन: 1290 ईस्वी में खिलजी वंश द्वारा।

चेतावनी (Warning): कई बार छात्र गुलाम वंश के शासकों के क्रम और उनके प्रमुख कार्यों को लेकर भ्रमित हो जाते हैं। अपनी तैयारी को पुख्ता करने के लिए एक समयरेखा (timeline) बनाकर अध्ययन करें और हर शासक के विशिष्ट योगदान को अलग से नोट करें।

UPTET परीक्षा की तैयारी के लिए Unictest के संसाधन (Unictest Resources for UPTET Exam Preparation)

Unictest पर आपको UPTET इतिहास सहित सभी विषयों के लिए व्यापक अध्ययन सामग्री, विशेषज्ञ नोट्स, अभ्यास प्रश्न और मॉक टेस्ट मिलेंगे। हमारे प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके आप गुलाम वंश और दिल्ली सल्तनत के अन्य राजवंशों की अवधारणाओं को गहराई से समझ सकते हैं। नियमित अभ्यास और सही मार्गदर्शन के साथ, आप निश्चित रूप से UPTET परीक्षा में सफलता प्राप्त करेंगे।

अपनी तैयारी को आज ही Unictest के साथ शुरू करें और अपने शिक्षक बनने के सपने को साकार करें!

🎯 Ready to Crack UPTET?

Start with a free mock test — No credit card required

Tughlaq Dynasty for Paper 2" — It's Free!

Frequently Asked Questions (UPTET)

गुलाम वंश की स्थापना 1206 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी। वह मोहम्मद गोरी का एक योग्य सैन्य गुलाम था। गोरी की मृत्यु के बाद, उसके कोई उत्तराधिकारी न होने के कारण, ऐबक ने अपनी योग्यता और सैन्य समर्थन से लाहौर में खुद को स्वतंत्र शासक घोषित कर दिल्ली सल्तनत की नींव रखी।

इल्तुतमिश को दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक माना जाता है क्योंकि उसने राजधानी को लाहौर से दिल्ली स्थानांतरित किया, तुर्कान-ए-चहलगानी का गठन किया, इक्ता प्रणाली की शुरुआत की और चांदी का टंका व तांबे का जीतल जैसे सिक्के चलाए। उसने सल्तनत को एक मजबूत प्रशासनिक और वित्तीय आधार प्रदान किया, जिससे यह एक स्थायी राज्य बन सका।

रजिया सुल्तान के शासनकाल की प्रमुख चुनौतियाँ तुर्की अमीरों का विरोध, उसका महिला होना और गैर-तुर्क सरदारों को महत्व देना था। तुर्की अमीर एक महिला के अधीन शासन करना पसंद नहीं करते थे और लगातार उसे चुनौती देते रहे। उसे कई विद्रोहों का सामना करना पड़ा और अंततः उसे अपदस्थ कर मार दिया गया।

बलबन की राजत्व नीति 'ईश्वरीय सिद्धांत' पर आधारित थी। उसका मानना था कि सुल्तान ईश्वर का प्रतिनिधि (नियाबत-ए-खुदाई) होता है और उसका पद पैगंबर के बाद आता है। उसने अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने और अमीरों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए 'लौह एवं रक्त की नीति' अपनाई और सिजदा व पैबोस जैसी ईरानी प्रथाएं शुरू कीं।

UPTET परीक्षा में गुलाम वंश से संबंधित प्रश्न अक्सर संस्थापक, प्रमुख शासकों के नाम और उनके महत्वपूर्ण योगदानों पर केंद्रित होते हैं। जैसे, 'लाख बख्श' किसे कहा जाता था, इक्ता प्रणाली किसने शुरू की, कुतुब मीनार का निर्माण किसने पूरा करवाया, या दिल्ली सल्तनत की पहली महिला शासिका कौन थी। प्रशासनिक सुधारों और नीतियों पर भी प्रश्न आ सकते हैं।

UPTET Test Series

500+ Tests | PYQs | Detailed Solutions

Start Now