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Study Notes

उत्तर प्रदेश में प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलन (1919-47): UP Police Constable 2026 के लिए विस्तृत अध्ययन | Major National Movements in Uttar Pradesh (1919-47): Detailed Study for UP Police Constable 2026

उत्तर प्रदेश में प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलन (1919-47): UP Police Constable परीक्षा 2026 के लिए महत्वपूर्ण | Major National Movements in UP (1919-47): Crucial for UP Police Constable Exam 2026

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Unictest Team

Updated: 2026-05-01 · English

उत्तर प्रदेश में प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलन (1919-47): UP Police Constable 2026 के लिए विस्तृत अध्ययन | Major National Movements in Uttar Pradesh (1919-47): Detailed Study for UP Police Constable 2026

उत्तर प्रदेश, जिसे उस समय संयुक्त प्रांत (United Provinces) के नाम से जाना जाता था, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। 1919 से 1947 तक का काल राष्ट्रीय आंदोलन के लिए अत्यंत निर्णायक था, जिसमें उत्तर प्रदेश ने कई प्रमुख आंदोलनों और घटनाओं में अग्रणी भूमिका निभाई। इस खंड में, हम UP Police Constable परीक्षा 2026 के लिए उत्तर प्रदेश में हुए प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलनों का विस्तृत अध्ययन करेंगे।


असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) और उत्तर प्रदेश (1920-22)

महात्मा गांधी द्वारा शुरू किया गया असहयोग आंदोलन (1920-22) पूरे देश में फैल गया था, और उत्तर प्रदेश में इसका जबरदस्त प्रभाव देखा गया। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग न करके स्वराज प्राप्त करना था।

  • लखनऊ: असहयोग आंदोलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना, जहाँ छात्रों, वकीलों और किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
  • चौरी-चौरा कांड (Chauri Chaura Incident), गोरखपुर (1922): यह घटना असहयोग आंदोलन के स्थगन का प्रमुख कारण बनी। 4 फरवरी, 1922 को गोरखपुर के चौरी-चौरा में प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस थाने में आग लगा दी, जिससे कई पुलिसकर्मी मारे गए। इस घटना के बाद गांधीजी ने आंदोलन को वापस ले लिया।
  • इलाहाबाद (प्रयागराज): मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेता इस आंदोलन में सक्रिय थे। इलाहाबाद में स्वराज भवन और आनंद भवन राष्ट्रीय आंदोलन के केंद्र थे।
मुख्य बिंदु: असहयोग आंदोलन के दौरान UP में ब्रिटिश शिक्षण संस्थानों का बहिष्कार किया गया और राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना की गई। खादी को बढ़ावा दिया गया और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर जोर दिया गया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) और उत्तर प्रदेश (1930-34)

दांडी मार्च (1930) के साथ शुरू हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश कानूनों को शांतिपूर्वक तोड़ना था। उत्तर प्रदेश में भी इस आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया:

  • नमक कानून तोड़ना: हालांकि UP एक भू-आबद्ध राज्य है, फिर भी यहां के लोगों ने प्रतीकात्मक रूप से नमक कानून तोड़ा और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए।
  • भू-राजस्व का भुगतान न करना: किसानों ने भू-राजस्व और चौकीदारी कर का भुगतान करने से इनकार कर दिया, खासकर अवध और पूर्वी UP के क्षेत्रों में।
  • नेताओं की भूमिका: जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत, रफी अहमद किदवई जैसे नेता UP में इस आंदोलन को गति दे रहे थे।
  • लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां: ब्रिटिश सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए क्रूरता का सहारा लिया, जिससे बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां और लाठीचार्ज हुए।

भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) और उत्तर प्रदेश (1942)

अगस्त 1942 में शुरू हुआ भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम बड़ा आंदोलन था। महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' का नारा दिया, जिसने पूरे देश को आंदोलित कर दिया।

  • तत्काल प्रतिक्रिया: 9 अगस्त, 1942 को गांधीजी और अन्य प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद, UP में स्वतः स्फूर्त विद्रोह भड़क उठा।
  • छात्रों और युवाओं की भूमिका: इलाहाबाद, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर जैसे शहरों में छात्रों और युवाओं ने जुलूस निकाले, हड़तालें कीं और सरकारी इमारतों पर हमला किया।
  • बलिया में समानांतर सरकार: चित्तू पांडे के नेतृत्व में बलिया में कुछ समय के लिए एक समानांतर सरकार (Parallel Government) की स्थापना की गई, जिसने ब्रिटिश शासन को चुनौती दी।
  • महिला सहभागिता: अरुणा आसफ अली जैसी महिला नेताओं ने भूमिगत रहते हुए आंदोलन का संचालन किया।

इन प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलनों के अलावा, उत्तर प्रदेश में कई छोटे लेकिन महत्वपूर्ण आंदोलन और घटनाएं भी हुईं, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। UP Police Constable परीक्षा की तैयारी के लिए इन सभी घटनाओं, उनके कारणों और परिणामों को समझना आवश्यक है।

Important Topics Data

आंदोलन/घटना (Movement/Event)वर्ष (Year)उत्तर प्रदेश में प्रमुख केंद्र/नेता (Key Centers/Leaders in UP)विशेष योगदान (Special Contribution)
असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement)1920-1922लखनऊ, इलाहाबाद, गोरखपुर (चौरी-चौरा)चौरी-चौरा घटना, खादी का प्रचार, राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना
अवध किसान सभा (Awadh Kisan Sabha)1920प्रतापगढ़, रायबरेली, सुल्तानपुरबाबा रामचंद्र के नेतृत्व में किसान अधिकारों के लिए संघर्ष
एका आंदोलन (Eka Movement)1921-1922हरदोई, बहराइच, सीतापुरमदारी पासी के नेतृत्व में लगान वृद्धि के खिलाफ आंदोलन
काकोरी कांड (Kakori Conspiracy)1925काकोरी (लखनऊ के पास)HRA द्वारा सरकारी खजाना लूटना, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान
सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement)1930-1934इलाहाबाद, लखनऊ, कानपुरनमक कानून तोड़ना (प्रतीकात्मक), भू-राजस्व न देना, जवाहरलाल नेहरू की सक्रियता
भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement)1942बलिया, इलाहाबाद, वाराणसी, कानपुरबलिया में समानांतर सरकार (चित्तू पांडे), 'करो या मरो' का नारा

Detailed Notes

उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन और क्रांतिकारी गतिविधियां

राष्ट्रीय आंदोलनों के साथ-साथ, उत्तर प्रदेश में किसानों और मजदूरों ने भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया, जिसने स्वतंत्रता संग्राम को एक नया आयाम दिया।

  • अवध किसान सभा (Awadh Kisan Sabha): 1920 में बाबा रामचंद्र के नेतृत्व में प्रतापगढ़ में अवध किसान सभा का गठन हुआ। इसका उद्देश्य किसानों को जमींदारों और तालुकदारों के शोषण से मुक्ति दिलाना था। यह सभा धीरे-धीरे पूरे अवध क्षेत्र में फैल गई।
  • एका आंदोलन (Eka Movement): 1921-22 में हरदोई, बहराइच, सीतापुर जैसे जिलों में मदारी पासी के नेतृत्व में एका आंदोलन शुरू हुआ। इस आंदोलन का मुख्य कारण लगान में वृद्धि और बेदखली थी।
  • क्रांतिकारी गतिविधियां: उत्तर प्रदेश क्रांतिकारी गतिविधियों का भी गढ़ रहा है।
  • काकोरी कांड (Kakori Conspiracy), 1925: राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी, रोशन सिंह जैसे क्रांतिकारियों ने लखनऊ के पास काकोरी में ट्रेन लूटकर सरकारी खजाना लूटा। यह घटना हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) द्वारा की गई थी।
  • मेरठ षड्यंत्र केस (Meerut Conspiracy Case), 1929: इसमें कई कम्युनिस्ट और ट्रेड यूनियन नेताओं को ब्रिटिश सरकार के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
महत्वपूर्ण तथ्य: UP के कई शहरों जैसे कानपुर, इलाहाबाद, आगरा, वाराणसी में क्रांतिकारी संगठन सक्रिय थे, जिन्होंने युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा।

प्रमुख व्यक्तित्व और उनका योगदान

उत्तर प्रदेश ने स्वतंत्रता संग्राम को कई महान नेता दिए, जिन्होंने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:

  • मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू: इलाहाबाद से, इन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • गोविंद बल्लभ पंत: उत्तराखंड से होने के बावजूद, इन्होंने UP में रहकर राजनीतिक गतिविधियों का संचालन किया और बाद में UP के पहले मुख्यमंत्री बने।
  • मदन मोहन मालवीय: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक और एक प्रमुख राष्ट्रवादी नेता, जिन्होंने शिक्षा और राष्ट्रीय जागृति में योगदान दिया।
  • पुरुषोत्तम दास टंडन: 'राजर्षि' के नाम से विख्यात, इन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए संघर्ष किया और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे।
  • रफी अहमद किदवई: एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और बाद में केंद्रीय मंत्री बने।

इन आंदोलनों और नेताओं के योगदान ने उत्तर प्रदेश को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूतों में से एक बना दिया। UP Police Constable 2026 परीक्षा के लिए इन सभी तथ्यों को गहराई से समझना आपके लिए अत्यंत लाभकारी होगा। Unictest आपको इन सभी विषयों पर विस्तृत अध्ययन सामग्री और अभ्यास प्रश्न प्रदान करता है।

Important Questions & Tips

UP Police Constable 2026: UP के राष्ट्रीय आंदोलनों की तैयारी कैसे करें?

UP Police Constable परीक्षा में उत्तर प्रदेश के इतिहास से जुड़े प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। 1919-47 के प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलन एक महत्वपूर्ण खंड हैं। यहां कुछ तैयारी के टिप्स दिए गए हैं:

  • समयरेखा (Timeline) बनाएं: प्रमुख आंदोलनों, घटनाओं और उनकी तिथियों की एक विस्तृत समयरेखा बनाएं।
  • प्रमुख नेताओं पर ध्यान दें: UP से जुड़े प्रमुख नेताओं, उनके योगदान और उनके द्वारा शुरू किए गए आंदोलनों को याद करें।
  • स्थानों का महत्व: चौरी-चौरा, काकोरी, बलिया, इलाहाबाद जैसे महत्वपूर्ण स्थानों और उनसे जुड़ी घटनाओं को समझें।
  • किसान/जनजातीय आंदोलन: UP में हुए किसान आंदोलनों (जैसे एका, अवध किसान सभा) और उनके नेताओं को विशेष रूप से पढ़ें।
  • प्रीवियस ईयर पेपर्स: पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का अभ्यास करें ताकि आपको प्रश्नों के पैटर्न और महत्व का अंदाजा हो सके।
सावधान रहें: केवल राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलनों को न पढ़ें, बल्कि यह भी देखें कि UP में उनका क्या विशिष्ट प्रभाव रहा और कौन से स्थानीय नेता सक्रिय थे। तथ्यात्मक जानकारी पर विशेष ध्यान दें।

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यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप इस खंड में अच्छा प्रदर्शन करें, नियमित रूप से रिवीजन करें और Unictest के मॉक टेस्ट में भाग लें। शुभकामनाएँ!

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Frequently Asked Questions (UP POLICE CONSTABLE)

उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रांत) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। इसने असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो जैसे प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। चौरी-चौरा कांड, काकोरी कांड और बलिया में समानांतर सरकार का गठन जैसी कई महत्वपूर्ण घटनाएं यहीं हुईं। मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत जैसे कई प्रमुख नेता UP से ही थे, जिन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व किया।

चौरी-चौरा कांड 4 फरवरी, 1922 को गोरखपुर के चौरी-चौरा में हुआ था, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस थाने में आग लगा दी थी, जिससे कई पुलिसकर्मी मारे गए। इस हिंसक घटना से आहत होकर महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को तत्काल वापस ले लिया था। इस घटना ने आंदोलन की दिशा बदल दी और गांधीजी के अहिंसक सिद्धांतों के महत्व को पुनः स्थापित किया।

UP Police Constable परीक्षा के लिए राष्ट्रीय आंदोलनों से संबंधित तथ्यों को याद रखने के लिए एक समयरेखा बनाएं, जिसमें आंदोलनों के नाम, वर्ष, प्रमुख नेता और UP में हुई विशिष्ट घटनाओं का उल्लेख हो। मानचित्र का उपयोग करके महत्वपूर्ण स्थानों को चिह्नित करें। नियमित रिवीजन और पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का अभ्यास करें। Unictest की अध्ययन सामग्री और मॉक टेस्ट भी आपकी तैयारी में सहायक होंगे।

उत्तर प्रदेश में 1919-47 के दौरान कई महत्वपूर्ण किसान आंदोलन हुए। इनमें 1920 में बाबा रामचंद्र के नेतृत्व में गठित अवध किसान सभा और 1921-22 में मदारी पासी के नेतृत्व में हुआ एका आंदोलन प्रमुख थे। इन आंदोलनों का उद्देश्य किसानों को जमींदारों और तालुकदारों के शोषण से मुक्ति दिलाना तथा लगान वृद्धि और बेदखली के खिलाफ संघर्ष करना था।

भारत छोड़ो आंदोलन (1942) में उत्तर प्रदेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। महात्मा गांधी की गिरफ्तारी के बाद, UP में स्वतः स्फूर्त विद्रोह भड़क उठा। बलिया में चित्तू पांडे के नेतृत्व में कुछ समय के लिए एक समानांतर सरकार की स्थापना की गई, जो ब्रिटिश शासन के लिए एक बड़ी चुनौती थी। इलाहाबाद, वाराणसी और कानपुर जैसे शहरों में छात्रों और आम जनता ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।

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