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Study Notes

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का इतिहास और संरचना | History & Structure of Allahabad High Court

यूपी पुलिस कांस्टेबल परीक्षा 2026 के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय का इतिहास और संरचना समझें | Understand the History & Structure of Allahabad High Court for UP Police Constable Exam 2026

Practice Questions
Author

Unictest Team

Updated: 2026-05-01 · English

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का इतिहास और संरचना | History & Structure of Allahabad High Court

उत्तर प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) का एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह न केवल भारत के सबसे पुराने उच्च न्यायालयों में से एक है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक जड़ें और विशाल क्षेत्राधिकार इसे देश के सबसे प्रभावशाली न्यायिक संस्थानों में से एक बनाते हैं। यूपी पुलिस कांस्टेबल परीक्षा (UP Police Constable Exam) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए इसकी स्थापना, विकास और संरचना को समझना अत्यंत आवश्यक है। यह खंड आपको इलाहाबाद उच्च न्यायालय के गौरवशाली इतिहास और इसकी मूलभूत संरचना से परिचित कराएगा।


इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना और प्रारंभिक इतिहास (Establishment and Early History)

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 17 मार्च, 1866 को हुई थी। इसे 'हाई कोर्ट्स एक्ट, 1861' के तहत 'नार्थ-वेस्टर्न प्रोविंसेज़ के लिए उच्च न्यायालय' (High Court of Judicature for the North-Western Provinces) के रूप में आगरा में स्थापित किया गया था। इस अधिनियम का उद्देश्य भारत में उच्च न्यायालयों की स्थापना कर न्यायिक प्रणाली को सुदृढ़ करना था।

शुरुआत में, इस न्यायालय का क्षेत्राधिकार उत्तर-पश्चिमी प्रांतों (जो आज के उत्तर प्रदेश का अधिकांश भाग है) तक फैला हुआ था। 1869 में, न्यायालय को आगरा से इलाहाबाद स्थानांतरित कर दिया गया और इसका नाम बदलकर 'उच्च न्यायालय इलाहाबाद' (High Court at Allahabad) कर दिया गया। यह स्थानांतरण इलाहाबाद की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक महत्व को देखते हुए किया गया था। पहले मुख्य न्यायाधीश सर वाल्टर मॉर्गन (Sir Walter Morgan) थे, जिन्होंने न्यायालय के प्रारंभिक वर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वतंत्रता के बाद, 1948 में, उत्तर प्रदेश राज्य के गठन के साथ, अवध मुख्य न्यायालय (Chief Court of Oudh), जो लखनऊ में स्थित था, को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के साथ मिला दिया गया। यह विलय 'उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय (समामेलन) आदेश, 1948' (Uttar Pradesh High Court (Amalgamation) Order, 1948) के तहत हुआ, जिससे इलाहाबाद उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार और भी विस्तृत हो गया। इस विलय के परिणामस्वरूप, लखनऊ में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक स्थायी पीठ (Permanent Bench) की स्थापना की गई, जो आज भी कार्यरत है।

जानकारी: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कई ऐतिहासिक मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं, जिन्होंने भारतीय कानून और न्यायशास्त्र को आकार दिया है। इसकी समृद्ध विरासत और आधुनिक न्यायिक प्रणाली में इसका योगदान इसे भारतीय न्यायपालिका का एक आधार स्तंभ बनाता है।

यूपी पुलिस कांस्टेबल और अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए, उम्मीदवारों को न्यायालय की स्थापना की तिथि, प्रारंभिक स्थान, स्थानांतरण की तिथि, और अवध मुख्य न्यायालय के साथ इसके विलय से संबंधित तथ्यों को याद रखना चाहिए। ये तथ्य अक्सर सामान्य ज्ञान (General Knowledge) और भारतीय राजव्यवस्था (Indian Polity) अनुभागों में पूछे जाते हैं।

Important Topics Data

विवरण (Detail)जानकारी (Information)
स्थापना की तिथि17 मार्च, 1866
प्रारंभिक नामनार्थ-वेस्टर्न प्रोविंसेज़ के लिए उच्च न्यायालय
प्रारंभिक स्थानआगरा (Agra)
इलाहाबाद स्थानांतरण1869
अवध मुख्य न्यायालय का विलय1948 (उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय (समामेलन) आदेश, 1948)
पहले मुख्य न्यायाधीशसर वाल्टर मॉर्गन (Sir Walter Morgan)

Detailed Notes

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की संरचना और क्षेत्राधिकार (Structure and Jurisdiction)

इलाहाबाद उच्च न्यायालय भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 के तहत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है। इसकी संरचना में एक मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) और कई अन्य न्यायाधीश शामिल होते हैं। भारतीय संविधान के अनुसार, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या निश्चित नहीं होती है; इसे राष्ट्रपति द्वारा आवश्यकतानुसार निर्धारित किया जाता है। वर्तमान में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या (Sanctioned Strength) भारत के किसी भी उच्च न्यायालय में सबसे अधिक है, जो इसकी विशाल कार्यप्रणाली को दर्शाती है।

  • मुख्य पीठ (Principal Seat): इलाहाबाद (प्रयागराज)
  • स्थायी पीठ (Permanent Bench): लखनऊ
  • न्यायाधीशों की नियुक्ति: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करते समय, राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करते हैं। अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से भी परामर्श किया जाता है।

क्षेत्राधिकार (Jurisdiction)

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार बहुत व्यापक है और यह विभिन्न प्रकार के मामलों को सुनता है:

  • मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction): कुछ मामलों में, जैसे कि चुनाव याचिकाएँ (Election Petitions), विवाह से संबंधित मामले, और कंपनी कानून से संबंधित मामले, उच्च न्यायालय सीधे सुनवाई कर सकता है।
  • अपीलीय क्षेत्राधिकार (Appellate Jurisdiction): यह दीवानी (Civil) और आपराधिक (Criminal) दोनों प्रकार के मामलों में अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) के निर्णयों के खिलाफ अपील सुनता है। यह इसका सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्राधिकार है।
  • रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction): संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत, उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के प्रवर्तन और अन्य कानूनी अधिकारों के लिए विभिन्न प्रकार की रिट (जैसे बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा) जारी कर सकता है। यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक शक्तिशाली उपकरण है।
  • पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकार (Supervisory Jurisdiction): अनुच्छेद 227 के तहत, उच्च न्यायालय अपने अधीनस्थ सभी न्यायालयों और न्यायाधिकरणों (Tribunals) का पर्यवेक्षण करता है और उनके कार्यों पर नियंत्रण रखता है।
महत्वपूर्ण तथ्य: इलाहाबाद उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार पूरे उत्तर प्रदेश राज्य पर लागू होता है, जिसमें इसकी मुख्य पीठ प्रयागराज और स्थायी पीठ लखनऊ दोनों शामिल हैं।

यूपी पुलिस कांस्टेबल परीक्षा के लिए, उम्मीदवारों को उच्च न्यायालय की भूमिका, न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया और विभिन्न प्रकार के क्षेत्राधिकारों को समझना चाहिए। न्यायिक शब्दावली और संबंधित संवैधानिक अनुच्छेदों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

Important Questions & Tips

यूपी पुलिस कांस्टेबल परीक्षा के लिए तैयारी युक्तियाँ (Preparation Tips for UP Police Constable Exam)

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के इतिहास और संरचना से संबंधित प्रश्न अक्सर यूपी पुलिस कांस्टेबल परीक्षा के सामान्य ज्ञान और भारतीय राजव्यवस्था खंड में पूछे जाते हैं। इन विषयों पर अच्छी पकड़ बनाने के लिए निम्नलिखित युक्तियाँ अपनाएँ:

  • महत्वपूर्ण तिथियाँ याद रखें: स्थापना की तिथि, आगरा से इलाहाबाद स्थानांतरण की तिथि, और अवध मुख्य न्यायालय के साथ विलय की तिथि।
  • प्रमुख हस्तियाँ: पहले मुख्य न्यायाधीश का नाम और वर्तमान मुख्य न्यायाधीश का नाम।
  • संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 214 (उच्च न्यायालयों का गठन), अनुच्छेद 226 (रिट क्षेत्राधिकार), और अनुच्छेद 227 (पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकार) को समझें।
  • संरचना और क्षेत्राधिकार: न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या (लगभग), मुख्य पीठ और स्थायी पीठ का स्थान, और विभिन्न प्रकार के क्षेत्राधिकारों (मूल, अपीलीय, रिट, पर्यवेक्षी) को जानें।
  • करंट अफेयर्स: उच्च न्यायालय से संबंधित किसी भी हालिया महत्वपूर्ण निर्णय या न्यायाधीशों की नई नियुक्तियों पर नज़र रखें।
Unictest सलाह: नियमित रूप से मॉक टेस्ट का अभ्यास करें और पिछले वर्ष के प्रश्नपत्रों (Previous Year Papers) का विश्लेषण करें ताकि आप प्रश्नों के पैटर्न और महत्व को समझ सकें।

इस विषय पर नोट्स बनाएँ और उन्हें नियमित रूप से दोहराएँ। यह आपको परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेगा। Unictest पर आपको इस विषय से संबंधित विस्तृत अध्ययन सामग्री और अभ्यास प्रश्न मिलेंगे, जो आपकी तैयारी को और मजबूत करेंगे।

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Frequently Asked Questions (UP POLICE CONSTABLE)

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना 17 मार्च, 1866 को 'नार्थ-वेस्टर्न प्रोविंसेज़ के लिए उच्च न्यायालय' के रूप में आगरा में हुई थी। बाद में, 1869 में इसे इलाहाबाद स्थानांतरित कर दिया गया और इसका नाम बदलकर 'उच्च न्यायालय इलाहाबाद' कर दिया गया। यह भारत के सबसे पुराने उच्च न्यायालयों में से एक है।

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