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Mock Tests 2026

Super TET Hindi Sandhi Rules & Examples 2026 | सुपर TET हिंदी संधि नियम और उदाहरण

Master Sandhi for Super TET 2026! Learn key rules, practice with examples, and boost your Hindi score with Unictest.

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Author

Yadvendra Singh Pal

Founder & Director,Unictest. M.Sc (Maths), MCA & Full-Stack Developer. Former Senior Academic Counsellor with 3+ years of expertise in Teaching Exams (CTET, KVS, DSSSB) and JEE/NEET mentorship. I bridge the gap between complex exam pedagogy and intuitive technology to help students achieve success.Founder & Director Unictest. M.Sc (Maths) MCA & Full-Stack Developer. Former Senior Academic Counsellor with 3+ years of expertise in Teaching Exams (CTET KVS DSSSB) and JEE/NEET mentorship. I bridge the gap between complex exam pedagogy and intuitive technology to help students achieve success.

Updated: 2026-06-17 · हिंदी

SUPER TET Mock Test Series — Overview

नमस्ते मेरे प्यारे Super TET aspirants! Unictest पर आपका स्वागत है। आज हम हिंदी व्याकरण के एक बहुत ही महत्वपूर्ण और स्कोरिंग टॉपिक, 'संधि' (Sandhi) पर बात करने वाले हैं। मुझे पता है, कई बार स्टूडेंट्स को संधि के नियम थोड़े tricky लगते हैं, लेकिन believe me, अगर आप इसे सही तरीके से समझते हैं और नियमित अभ्यास करते हैं, तो ये आपके लिए एक game-changer साबित हो सकता है। Super TET 2026 में हिंदी सेक्शन में संधि से 2-3 प्रश्न तो पक्के आते हैं, और ये सीधे-सीधे मार्क्स होते हैं!


जब मैं अपने स्टूडेंट्स को संधि पढ़ाता हूँ, तो सबसे पहले यही कहता हूँ कि इसे रटने की बजाय समझने की कोशिश करो। एक बार नियम दिमाग में बैठ गए, तो फिर कोई भी उदाहरण आपके लिए मुश्किल नहीं होगा। चलिए, आज हम Super TET के लिए हिंदी संधि के नियमों और उदाहरणों को विस्तार से समझते हैं।


संधि क्या है? (What is Sandhi?)

Dekhiye dosto, संधि का शाब्दिक अर्थ होता है 'मेल' या 'समझौता'। व्याकरण में, जब दो निकटवर्ती वर्ण (अक्षर) आपस में मिलते हैं और उनके मिलने से जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे 'संधि' कहते हैं। आसान भाषा में कहें तो, दो शब्द जब पास आते हैं और उनके आखिरी और पहले अक्षर मिलकर एक नया रूप ले लेते हैं, वही संधि है। जैसे: विद्या + आलय = विद्यालय। यहां 'विद्या' का 'आ' और 'आलय' का 'आ' मिलकर 'आ' बन गया।


Expert Tip: संधि विच्छेद (Sandhi Viched) का मतलब होता है संधि युक्त शब्दों को अलग-अलग करना। जैसे 'विद्यालय' का संधि विच्छेद 'विद्या + आलय' है। Super TET में संधि और संधि विच्छेद दोनों से प्रश्न पूछे जाते हैं।

संधि के भेद (Types of Sandhi)

मुख्य रूप से संधि तीन प्रकार की होती है:

  • 1. स्वर संधि (Swar Sandhi)
  • 2. व्यंजन संधि (Vyanjan Sandhi)
  • 3. विसर्ग संधि (Visarg Sandhi)

चलिए, एक-एक करके इन्हें समझते हैं और साथ में ढेर सारे उदाहरण भी देखेंगे ताकि आपकी प्रैक्टिस यहीं से शुरू हो जाए।


1. स्वर संधि (Swar Sandhi)

जब दो स्वरों के मेल से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे स्वर संधि कहते हैं। यह सबसे महत्वपूर्ण और थोड़ा विस्तृत प्रकार है। स्वर संधि के भी पाँच उपभेद होते हैं:


a) दीर्घ संधि (Dirgha Sandhi)

जब दो समान स्वर (ह्रस्व या दीर्घ) आपस में मिलते हैं, तो वे मिलकर दीर्घ हो जाते हैं। आसान शब्दों में, 'अ/आ' के साथ 'अ/आ' मिले तो 'आ', 'इ/ई' के साथ 'इ/ई' मिले तो 'ई', और 'उ/ऊ' के साथ 'उ/ऊ' मिले तो 'ऊ' बन जाता है।


नियम:
अ + अ = आ (धर्म + अर्थ = धर्मार्थ)
अ + आ = आ (हिम + आलय = हिमालय)
आ + अ = आ (विद्या + अर्थी = विद्यार्थी)
आ + आ = आ (महा + आत्मा = महात्मा)
इ + इ = ई (कवि + इंद्र = कवीन्द्र)
इ + ई = ई (गिरि + ईश = गिरीश)
ई + इ = ई (मही + इंद्र = महींद्र)
ई + ई = ई (नदी + ईश = नदीश)
उ + उ = ऊ (भानु + उदय = भानूदय)
उ + ऊ = ऊ (लघु + ऊर्मि = लघूर्मि)
ऊ + उ = ऊ (वधू + उत्सव = वधूत्सव)
ऊ + ऊ = ऊ (भू + ऊर्ध्व = भूर्ध्व)


b) गुण संधि (Guna Sandhi)

जब 'अ' या 'आ' के बाद 'इ' या 'ई' आए तो 'ए' हो जाता है; 'उ' या 'ऊ' आए तो 'ओ' हो जाता है; और 'ऋ' आए तो 'अर्' हो जाता है।


नियम:
अ + इ = ए (नर + इंद्र = नरेंद्र)
अ + ई = ए (सुर + ईश = सुरेश)
आ + इ = ए (महा + इंद्र = महेंद्र)
आ + ई = ए (रमा + ईश = रमेश)
अ + उ = ओ (ज्ञान + उपदेश = ज्ञानोपदेश)
अ + ऊ = ओ (जल + ऊर्मि = जलोर्मि)
आ + उ = ओ (महा + उत्सव = महोत्सव)
आ + ऊ = ओ (गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि)
अ + ऋ = अर् (देव + ऋषि = देवर्षि)
आ + ऋ = अर् (महा + ऋषि = महर्षि)


c) वृद्धि संधि (Vriddhi Sandhi)

जब 'अ' या 'आ' के बाद 'ए' या 'ऐ' आए तो 'ऐ' हो जाता है; और 'ओ' या 'औ' आए तो 'औ' हो जाता है। यह गुण संधि का ही एक 'बढ़ा हुआ' रूप है, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है - 'वृद्धि'।


नियम:
अ + ए = ऐ (एक + एक = एकैक)
अ + ऐ = ऐ (मत + ऐक्य = मतैक्य)
आ + ए = ऐ (सदा + एव = सदैव)
आ + ऐ = ऐ (महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य)
अ + ओ = औ (वन + औषधि = वनौषधि)
अ + औ = औ (परम + औदार्य = परमौदार्य)
आ + ओ = औ (महा + ओज = महौज)
आ + औ = औ (महा + औषध = महौषध)


d) यण संधि (Yana Sandhi)

जब 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ' या 'ऋ' के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो 'इ'/'ई' का 'य', 'उ'/'ऊ' का 'व' और 'ऋ' का 'र' हो जाता है। यह थोड़ी अलग है, ध्यान से समझिएगा।


नियम:
इ + भिन्न स्वर = य (अति + अधिक = अत्यधिक)
ई + भिन्न स्वर = य (नदी + अर्पण = नद्यर्पण)
उ + भिन्न स्वर = व (सु + आगत = स्वागत)
ऊ + भिन्न स्वर = व (वधू + आगमन = वध्वागमन)
ऋ + भिन्न स्वर = र (पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा)


e) अयादि संधि (Ayadi Sandhi)

जब 'ए', 'ऐ', 'ओ', 'औ' के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो 'ए' का 'अय', 'ऐ' का 'आय', 'ओ' का 'अव' और 'औ' का 'आव' हो जाता है। यह भी थोड़ी tricky है, लेकिन अभ्यास से आसान हो जाती है। मैंने देखा है कि बहुत से स्टूडेंट्स इस संधि में गलती करते हैं, खासकर 'आय' और 'आव' वाले उदाहरणों में।


नियम:
ए + भिन्न स्वर = अय (ने + अन = नयन)
ऐ + भिन्न स्वर = आय (गै + अक = गायक)
ओ + भिन्न स्वर = अव (पो + अन = पवन)
औ + भिन्न स्वर = आव (पौ + अक = पावक)


सतर्क रहें! दीर्घ, गुण, वृद्धि संधियों में हमेशा स्वर दीर्घ या बदलता है, जबकि यण और अयादि में पहला स्वर बदल कर व्यंजन (य, व, र) जैसा हो जाता है और दूसरा स्वर उसमें जुड़ जाता है। यह एक key difference है जो आपको पहचान में मदद करेगा।

याद रखिए – Super TET में सिर्फ नियम नहीं, बल्कि उन नियमों को उदाहरणों पर apply करना आना चाहिए। इसलिए, इन नियमों को बार-बार पढ़ें और दिए गए उदाहरणों को खुद से विच्छेद करने की कोशिश करें। मैंने पर्सनली देखा है कि जो बच्चे नियम याद करके उदाहरणों पर प्रैक्टिस नहीं करते, वे एग्जाम में confuse हो जाते हैं। तो, बस पढ़ते मत रहिए, करके भी देखिए!

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Test Series Features

पिछली क्लास में हमने स्वर संधि को विस्तार से समझा। अब हम व्यंजन संधि और विसर्ग संधि की गहराई में जाएंगे, जो Super TET के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। ये दोनों संधियां थोड़ी सी जटिल लग सकती हैं, लेकिन अगर आप नियम और उनके पीछे के तर्क को समझ जाते हैं, तो ये भी आपके लिए स्कोरिंग बन जाएंगी।


2. व्यंजन संधि (Vyanjan Sandhi)

जब किसी व्यंजन का मेल किसी व्यंजन या स्वर से होने पर जो विकार उत्पन्न होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं। व्यंजन संधि के नियम थोड़े ज्यादा होते हैं, लेकिन चिंता मत कीजिए, Unictest पर हम इन्हें simplified तरीके से समझेंगे।


महत्वपूर्ण व्यंजन संधि नियम और उदाहरण:

  • नियम 1: वर्ग के पहले वर्ण का तीसरे वर्ण में परिवर्तन
    यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क, च, ट, त, प) का मेल किसी स्वर या वर्ग के तीसरे/चौथे वर्ण (ग, घ, ज, झ, ड, ढ, द, ध, ब, भ) या य, र, ल, व से हो तो पहला वर्ण अपने ही वर्ग के तीसरे वर्ण में बदल जाता है।
    उदाहरण:
    दिक + अंबर = दिगंबर
    दिक + गज = दिग्गज
    वाक् + ईश = वागीश
    अच् + अंत = अजंत
    षट् + आनन = षडानन
    षट् + दर्शन = षड्दर्शन
    उत् + योग = उद्योग
    सत् + भावना = सद्भावना
    जगत् + ईश = जगदीश
    अप + ज = अब्ज

  • नियम 2: वर्ग के पहले वर्ण का पाँचवें वर्ण में परिवर्तन
    यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क, च, ट, त, प) का मेल किसी अनुनासिक वर्ण (ङ, ञ, ण, न, म) से हो तो पहला वर्ण अपने ही वर्ग के पाँचवें वर्ण में बदल जाता है।
    उदाहरण:
    वाक् + मय = वाङ्मय
    षट् + मास = षण्मास
    उत् + नति = उन्नति
    चित् + मय = चिन्मय
    जगत् + नाथ = जगन्नाथ

  • नियम 3: 'त' संबंधी नियम
    अ) 'त' के बाद 'च' या 'छ' हो तो 'त' का 'च' हो जाता है। (उत् + चारण = उच्चारण)
    ब) 'त' के बाद 'ज' या 'झ' हो तो 'त' का 'ज' हो जाता है। (सत् + जन = सज्जन)
    स) 'त' के बाद 'ट' या 'ठ' हो तो 'त' का 'ट' हो जाता है। (तत् + टीका = तट्टीका)
    द) 'त' के बाद 'ड' या 'ढ' हो तो 'त' का 'ड' हो जाता है। (उत् + डयन = उड्डयन)
    य) 'त' के बाद 'ल' हो तो 'त' का 'ल' हो जाता है। (उत् + लास = उल्लास)
    र) 'त' के बाद 'श' हो तो 'त' का 'च' और 'श' का 'छ' हो जाता है। (उत् + श्वास = उच्छ्वास)
    ल) 'त' के बाद 'ह' हो तो 'त' का 'द' और 'ह' का 'ध' हो जाता है। (उत् + हार = उद्धार)

  • नियम 4: 'म' संबंधी नियम
    अ) 'म' के बाद कोई स्पर्श व्यंजन आए तो 'म' उसी वर्ग के पाँचवें वर्ण (अनुस्वार) में बदल जाता है। (सम् + कल्प = संकल्प)
    ब) 'म' के बाद य, र, ल, व, श, ष, स, ह में से कोई वर्ण आए तो 'म' अनुस्वार में बदल जाता है। (सम् + योग = संयोग)
    उदाहरण:
    सम् + पूर्ण = सम्पूर्ण / संपन्न
    सम् + मान = सम्मान
    सम् + गम = संगम
    सम् + हार = संहार

  • नियम 5: 'छ' संबंधी नियम
    किसी भी स्वर के बाद 'छ' आए तो 'छ' से पहले 'च्' जुड़ जाता है।
    उदाहरण:
    स्व + छंद = स्वच्छंद
    परि + छेद = परिच्छेद
    आ + छादन = आच्छादन

3. विसर्ग संधि (Visarg Sandhi)

जब विसर्ग (:) का मेल किसी स्वर या व्यंजन से होने पर जो विकार उत्पन्न होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं। यह भी Super TET के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।


महत्वपूर्ण विसर्ग संधि नियम और उदाहरण:

  • नियम 1: विसर्ग का 'ओ' में परिवर्तन
    यदि विसर्ग से पहले 'अ' हो और बाद में 'अ' या किसी वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण (ग, घ, ज, झ, ड, ढ, द, ध, ब, भ, ङ, ञ, ण, न, म) या य, र, ल, व, ह हो तो विसर्ग 'ओ' में बदल जाता है।
    उदाहरण:
    मनः + रथ = मनोरथ
    मनः + बल = मनोबल
    तपः + भूमि = तपोभूमि
    यशः + गान = यशोगान

  • नियम 2: विसर्ग का 'र' में परिवर्तन
    यदि विसर्ग से पहले 'अ/आ' को छोड़कर कोई अन्य स्वर हो और बाद में कोई स्वर या वर्ग का तीसरा, चौथा, पाँचवाँ वर्ण या य, र, ल, व, ह हो तो विसर्ग 'र' में बदल जाता है।
    उदाहरण:
    निः + आशा = निराशा
    दुः + जन = दुर्जन
    निः + बल = निर्बल
    आशिः + वाद = आशीर्वाद

  • नियम 3: विसर्ग का 'श', 'ष', 'स' में परिवर्तन
    अ) विसर्ग के बाद 'च' या 'छ' हो तो विसर्ग 'श' में बदल जाता है। (निः + चल = निश्चल)
    ब) विसर्ग के बाद 'ट' या 'ठ' हो तो विसर्ग 'ष' में बदल जाता है। (धनुः + टंकार = धनुष्टंकार)
    स) विसर्ग के बाद 'त' या 'थ' हो तो विसर्ग 'स' में बदल जाता है। (नमः + ते = नमस्ते)
    उदाहरण:
    निः + छल = निश्छल
    दुः + चरित्र = दुश्चरित्र
    निः + ठुर = निष्ठुर
    निः + तार = निस्तार

  • नियम 4: विसर्ग का लोप (गायब हो जाना)
    अ) यदि विसर्ग से पहले 'अ/आ' हो और बाद में कोई भिन्न स्वर हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है। (अतः + एव = अतएव)
    ब) यदि विसर्ग के बाद 'र' हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है और विसर्ग से पहले का ह्रस्व स्वर दीर्घ हो जाता है। (निः + रोग = नीरोग)
    उदाहरण:
    निः + रस = नीरस

Expert Tip: व्यंजन और विसर्ग संधि को पहचानने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप संधि विच्छेद करके देखें। अगर संधि विच्छेद में आपको हलंत (्) वाला व्यंजन या विसर्ग (:) दिखता है, तो समझ जाइए कि यह व्यंजन या विसर्ग संधि है। स्वर संधि में सिर्फ स्वर ही मिलते हैं।

Super TET के लिए Sandhi की तैयारी कैसे करें? (Preparation Strategy)

Dekhiye, सिर्फ नियम पढ़ लेने से काम नहीं चलेगा। Super TET में सफलता के लिए एक systematic approach चाहिए।

  • नियमित अभ्यास: हर दिन कम से कम 30 मिनट हिंदी व्याकरण, खासकर संधि को दें। 10-15 उदाहरण रोज हल करें।
  • पिछले वर्षों के प्रश्न: Super TET और अन्य TET परीक्षाओं (CTET, UPTET, JTET) के पिछले 5-7 साल के प्रश्न पत्रों से संधि के प्रश्न हल करें। इससे आपको प्रश्नों के प्रकार और कठिनाई स्तर का अंदाजा होगा। मैंने देखा है कि कई बार प्रश्न सीधे-सीधे repeat भी हो जाते हैं।
  • शॉर्ट नोट्स बनाएं: हर संधि के नियम और उसके 2-3 मुख्य उदाहरणों के छोटे-छोटे नोट्स बनाएं। ये revision के समय बहुत काम आएंगे।
  • मॉक टेस्ट: Unictest के mock tests जरूर दें। ये आपको real exam environment देंगे और आपकी गलतियों को सुधारने का मौका मिलेगा।
  • संदर्भ पुस्तकें: अच्छी हिंदी व्याकरण की किताब से अभ्यास करें। मैं पर्सनली हरिवंश राय बच्चन की हिंदी व्याकरण या लुसेंट हिंदी व्याकरण को recommend करता हूँ।

याद रखिए, Super TET सिर्फ ज्ञान का नहीं, बल्कि गति और सटीकता का भी इम्तिहान है। संधि जैसे टॉपिक में आप कम समय में ज्यादा नंबर स्कोर कर सकते हैं, बशर्ते आपकी तैयारी पुख्ता हो। तो, आज से ही अपनी तैयारी को एक नई दिशा दीजिए!

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Frequently Asked Questions (SUPER TET)

संधि का अर्थ है वर्णों का मेल, जिससे उनमें विकार उत्पन्न होता है। Super TET 2026 में हिंदी सेक्शन में संधि से 2-3 प्रश्न सीधे-सीधे आते हैं, जो आपके स्कोर को significantly boost कर सकते हैं। यह एक स्कोरिंग टॉपिक है क्योंकि इसके नियम निश्चित होते हैं। यदि आप नियमों को समझकर अभ्यास करते हैं, तो इन प्रश्नों में पूरे अंक प्राप्त करना आसान हो जाता है, जिससे आपकी मेरिट लिस्ट में जगह बनाने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, Super TET में सफलता के लिए संधि की तैयारी बेहद महत्वपूर्ण है।

हिंदी व्याकरण में संधि के मुख्य तीन प्रकार होते हैं: स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि। स्वर संधि दो स्वरों के मेल से बनती है (जैसे विद्या + आलय = विद्यालय)। व्यंजन संधि में व्यंजन का स्वर या व्यंजन से मेल होता है (जैसे वाक् + ईश = वागीश), इसमें अक्सर हलंत वाले व्यंजन दिखते हैं। विसर्ग संधि में विसर्ग (:) का स्वर या व्यंजन से मेल होता है (जैसे मनः + रथ = मनोरथ)। इन्हें पहचानने के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि आप संधि विच्छेद करके देखें और देखें कि मिलन बिंदु पर क्या बदल रहा है – स्वर, व्यंजन या विसर्ग।

Super TET में संधि की तैयारी के लिए आप 'हरिवंश राय बच्चन की हिंदी व्याकरण' या 'लुसेंट सामान्य हिंदी व्याकरण' जैसी प्रामाणिक पुस्तकें रेफर कर सकते हैं। ये किताबें नियमों और उदाहरणों का विस्तृत संग्रह प्रदान करती हैं। इसके अलावा, Unictest पर उपलब्ध हमारे मॉक टेस्ट, प्रैक्टिस सेट्स और एक्सपर्ट द्वारा तैयार किए गए नोट्स आपके लिए बहुत उपयोगी होंगे। पिछले वर्षों के Super TET, CTET, UPTET के प्रश्न पत्रों से अभ्यास करना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे आपको परीक्षा पैटर्न और महत्वपूर्ण प्रश्नों का अंदाजा मिलता है।

Super TET में संधि के प्रश्नों को हल करते समय कुछ सामान्य गलतियाँ होती हैं, जैसे नियमों को केवल रटना और उन्हें उदाहरणों पर लागू न करना। छात्र अक्सर स्वर, व्यंजन और विसर्ग संधि के नियमों को आपस में भ्रमित कर देते हैं, जिससे गलत उत्तर चुन लेते हैं। अपर्याप्त अभ्यास के कारण भी सटीकता और गति प्रभावित होती है। इन गलतियों से बचने के लिए, हर नियम को उसके पीछे के तर्क के साथ समझें, विभिन्न प्रकार के उदाहरणों का नियमित अभ्यास करें, और Unictest के मॉक टेस्ट देकर अपनी गलतियों का विश्लेषण करें।

Super TET की हिंदी सेक्शन में कुल 20 प्रश्न होते हैं, जिनमें से 2 से 3 प्रश्न सीधे तौर पर संधि से संबंधित होते हैं। ये प्रश्न सीधे-सीधे अंक दिलाने वाले होते हैं क्योंकि संधि के नियम स्पष्ट और निश्चित होते हैं। यदि आप संधि के नियमों में महारत हासिल कर लेते हैं, तो आप इन 2-3 प्रश्नों में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त कर सकते हैं। यह आपके कुल स्कोर को 2-3 अंक तक बढ़ा सकता है, जो एक प्रतिस्पर्धी परीक्षा में मेरिट लिस्ट में आपकी स्थिति को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है।

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