Master Sandhi for Super TET 2026! Learn key rules, practice with examples, and boost your Hindi score with Unictest.
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Updated: 2026-06-17 · हिंदी
नमस्ते मेरे प्यारे Super TET aspirants! Unictest पर आपका स्वागत है। आज हम हिंदी व्याकरण के एक बहुत ही महत्वपूर्ण और स्कोरिंग टॉपिक, 'संधि' (Sandhi) पर बात करने वाले हैं। मुझे पता है, कई बार स्टूडेंट्स को संधि के नियम थोड़े tricky लगते हैं, लेकिन believe me, अगर आप इसे सही तरीके से समझते हैं और नियमित अभ्यास करते हैं, तो ये आपके लिए एक game-changer साबित हो सकता है। Super TET 2026 में हिंदी सेक्शन में संधि से 2-3 प्रश्न तो पक्के आते हैं, और ये सीधे-सीधे मार्क्स होते हैं!
जब मैं अपने स्टूडेंट्स को संधि पढ़ाता हूँ, तो सबसे पहले यही कहता हूँ कि इसे रटने की बजाय समझने की कोशिश करो। एक बार नियम दिमाग में बैठ गए, तो फिर कोई भी उदाहरण आपके लिए मुश्किल नहीं होगा। चलिए, आज हम Super TET के लिए हिंदी संधि के नियमों और उदाहरणों को विस्तार से समझते हैं।
Dekhiye dosto, संधि का शाब्दिक अर्थ होता है 'मेल' या 'समझौता'। व्याकरण में, जब दो निकटवर्ती वर्ण (अक्षर) आपस में मिलते हैं और उनके मिलने से जो विकार (परिवर्तन) उत्पन्न होता है, उसे 'संधि' कहते हैं। आसान भाषा में कहें तो, दो शब्द जब पास आते हैं और उनके आखिरी और पहले अक्षर मिलकर एक नया रूप ले लेते हैं, वही संधि है। जैसे: विद्या + आलय = विद्यालय। यहां 'विद्या' का 'आ' और 'आलय' का 'आ' मिलकर 'आ' बन गया।
मुख्य रूप से संधि तीन प्रकार की होती है:
चलिए, एक-एक करके इन्हें समझते हैं और साथ में ढेर सारे उदाहरण भी देखेंगे ताकि आपकी प्रैक्टिस यहीं से शुरू हो जाए।
जब दो स्वरों के मेल से जो विकार उत्पन्न होता है, उसे स्वर संधि कहते हैं। यह सबसे महत्वपूर्ण और थोड़ा विस्तृत प्रकार है। स्वर संधि के भी पाँच उपभेद होते हैं:
जब दो समान स्वर (ह्रस्व या दीर्घ) आपस में मिलते हैं, तो वे मिलकर दीर्घ हो जाते हैं। आसान शब्दों में, 'अ/आ' के साथ 'अ/आ' मिले तो 'आ', 'इ/ई' के साथ 'इ/ई' मिले तो 'ई', और 'उ/ऊ' के साथ 'उ/ऊ' मिले तो 'ऊ' बन जाता है।
नियम:
अ + अ = आ (धर्म + अर्थ = धर्मार्थ)
अ + आ = आ (हिम + आलय = हिमालय)
आ + अ = आ (विद्या + अर्थी = विद्यार्थी)
आ + आ = आ (महा + आत्मा = महात्मा)
इ + इ = ई (कवि + इंद्र = कवीन्द्र)
इ + ई = ई (गिरि + ईश = गिरीश)
ई + इ = ई (मही + इंद्र = महींद्र)
ई + ई = ई (नदी + ईश = नदीश)
उ + उ = ऊ (भानु + उदय = भानूदय)
उ + ऊ = ऊ (लघु + ऊर्मि = लघूर्मि)
ऊ + उ = ऊ (वधू + उत्सव = वधूत्सव)
ऊ + ऊ = ऊ (भू + ऊर्ध्व = भूर्ध्व)
जब 'अ' या 'आ' के बाद 'इ' या 'ई' आए तो 'ए' हो जाता है; 'उ' या 'ऊ' आए तो 'ओ' हो जाता है; और 'ऋ' आए तो 'अर्' हो जाता है।
नियम:
अ + इ = ए (नर + इंद्र = नरेंद्र)
अ + ई = ए (सुर + ईश = सुरेश)
आ + इ = ए (महा + इंद्र = महेंद्र)
आ + ई = ए (रमा + ईश = रमेश)
अ + उ = ओ (ज्ञान + उपदेश = ज्ञानोपदेश)
अ + ऊ = ओ (जल + ऊर्मि = जलोर्मि)
आ + उ = ओ (महा + उत्सव = महोत्सव)
आ + ऊ = ओ (गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि)
अ + ऋ = अर् (देव + ऋषि = देवर्षि)
आ + ऋ = अर् (महा + ऋषि = महर्षि)
जब 'अ' या 'आ' के बाद 'ए' या 'ऐ' आए तो 'ऐ' हो जाता है; और 'ओ' या 'औ' आए तो 'औ' हो जाता है। यह गुण संधि का ही एक 'बढ़ा हुआ' रूप है, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है - 'वृद्धि'।
नियम:
अ + ए = ऐ (एक + एक = एकैक)
अ + ऐ = ऐ (मत + ऐक्य = मतैक्य)
आ + ए = ऐ (सदा + एव = सदैव)
आ + ऐ = ऐ (महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य)
अ + ओ = औ (वन + औषधि = वनौषधि)
अ + औ = औ (परम + औदार्य = परमौदार्य)
आ + ओ = औ (महा + ओज = महौज)
आ + औ = औ (महा + औषध = महौषध)
जब 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ' या 'ऋ' के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो 'इ'/'ई' का 'य', 'उ'/'ऊ' का 'व' और 'ऋ' का 'र' हो जाता है। यह थोड़ी अलग है, ध्यान से समझिएगा।
नियम:
इ + भिन्न स्वर = य (अति + अधिक = अत्यधिक)
ई + भिन्न स्वर = य (नदी + अर्पण = नद्यर्पण)
उ + भिन्न स्वर = व (सु + आगत = स्वागत)
ऊ + भिन्न स्वर = व (वधू + आगमन = वध्वागमन)
ऋ + भिन्न स्वर = र (पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा)
जब 'ए', 'ऐ', 'ओ', 'औ' के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो 'ए' का 'अय', 'ऐ' का 'आय', 'ओ' का 'अव' और 'औ' का 'आव' हो जाता है। यह भी थोड़ी tricky है, लेकिन अभ्यास से आसान हो जाती है। मैंने देखा है कि बहुत से स्टूडेंट्स इस संधि में गलती करते हैं, खासकर 'आय' और 'आव' वाले उदाहरणों में।
नियम:
ए + भिन्न स्वर = अय (ने + अन = नयन)
ऐ + भिन्न स्वर = आय (गै + अक = गायक)
ओ + भिन्न स्वर = अव (पो + अन = पवन)
औ + भिन्न स्वर = आव (पौ + अक = पावक)
याद रखिए – Super TET में सिर्फ नियम नहीं, बल्कि उन नियमों को उदाहरणों पर apply करना आना चाहिए। इसलिए, इन नियमों को बार-बार पढ़ें और दिए गए उदाहरणों को खुद से विच्छेद करने की कोशिश करें। मैंने पर्सनली देखा है कि जो बच्चे नियम याद करके उदाहरणों पर प्रैक्टिस नहीं करते, वे एग्जाम में confuse हो जाते हैं। तो, बस पढ़ते मत रहिए, करके भी देखिए!
Exact pattern questions with timed interface
Subject-wise performance report
Focus your preparation strategically
Practice in your preferred language
पिछली क्लास में हमने स्वर संधि को विस्तार से समझा। अब हम व्यंजन संधि और विसर्ग संधि की गहराई में जाएंगे, जो Super TET के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। ये दोनों संधियां थोड़ी सी जटिल लग सकती हैं, लेकिन अगर आप नियम और उनके पीछे के तर्क को समझ जाते हैं, तो ये भी आपके लिए स्कोरिंग बन जाएंगी।
जब किसी व्यंजन का मेल किसी व्यंजन या स्वर से होने पर जो विकार उत्पन्न होता है, उसे व्यंजन संधि कहते हैं। व्यंजन संधि के नियम थोड़े ज्यादा होते हैं, लेकिन चिंता मत कीजिए, Unictest पर हम इन्हें simplified तरीके से समझेंगे।
जब विसर्ग (:) का मेल किसी स्वर या व्यंजन से होने पर जो विकार उत्पन्न होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं। यह भी Super TET के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Dekhiye, सिर्फ नियम पढ़ लेने से काम नहीं चलेगा। Super TET में सफलता के लिए एक systematic approach चाहिए।
याद रखिए, Super TET सिर्फ ज्ञान का नहीं, बल्कि गति और सटीकता का भी इम्तिहान है। संधि जैसे टॉपिक में आप कम समय में ज्यादा नंबर स्कोर कर सकते हैं, बशर्ते आपकी तैयारी पुख्ता हो। तो, आज से ही अपनी तैयारी को एक नई दिशा दीजिए!