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Study Notes

झारखंड उच्च न्यायालय: संरचना एवं कार्यप्रणाली | Jharkhand High Court: Composition and Functions

झारखंड उच्च न्यायालय की विस्तृत जानकारी: संरचना, न्यायाधीश, अधिकार क्षेत्र और महत्वपूर्ण कार्यप्रणाली को समझें।

Practice Questions
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Unictest Team

Updated: 2026-04-23 · English

झारखंड उच्च न्यायालय: संरचना एवं कार्यप्रणाली | Jharkhand High Court: Composition and Functions

झारखंड उच्च न्यायालय भारतीय न्यायपालिका का एक अभिन्न अंग है, जो राज्य में न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य के गठन के साथ ही रांची में इसका भी गठन किया गया था। यह भारत के 25 उच्च न्यायालयों में से एक है। प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर JTET और अन्य राज्य-स्तरीय परीक्षाओं के लिए, इसकी संरचना और कार्यों को समझना अत्यंत आवश्यक है। आइए, इसके विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करें।


झारखंड उच्च न्यायालय की संरचना (Composition of Jharkhand High Court)

संविधान के अनुच्छेद 214 के अनुसार, प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा। अनुच्छेद 216 यह निर्धारित करता है कि प्रत्येक उच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश और ऐसे अन्य न्यायाधीश शामिल होंगे, जिन्हें राष्ट्रपति समय-समय पर आवश्यक समझे। झारखंड उच्च न्यायालय की संरचना भी इसी संवैधानिक प्रावधानों के तहत कार्य करती है।


1. न्यायाधीशों की नियुक्ति (Appointment of Judges):

  • मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice): इनकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और संबंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से की जाती है।
  • अन्य न्यायाधीश (Other Judges): इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, राज्य के राज्यपाल और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की जाती है।

महत्वपूर्ण नोट: कॉलेजियम प्रणाली (Collegium System) न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

2. न्यायाधीशों की योग्यताएँ (Qualifications of Judges):

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए एक व्यक्ति को निम्नलिखित योग्यताएँ पूरी करनी चाहिए:

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • उसने भारत के राज्य क्षेत्र में कम से कम 10 वर्षों तक न्यायिक पद धारण किया हो, या
  • वह किसी उच्च न्यायालय या दो या अधिक ऐसे न्यायालयों में लगातार कम से कम 10 वर्षों तक अधिवक्ता रहा हो।

3. कार्यकाल और पदच्युति (Tenure and Removal):

  • उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक अपना पद धारण करते हैं।
  • वे राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा कभी भी अपना पद त्याग सकते हैं।
  • उन्हें संसद की सिफारिश पर राष्ट्रपति के आदेश से ही पद से हटाया जा सकता है। यह प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने के समान है, जिसमें 'साबित कदाचार या अक्षमता' के आधार पर विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।

4. शपथ और वेतन (Oath and Salary):

  • उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को पद ग्रहण करने से पहले राज्य के राज्यपाल या उनके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ लेनी होती है।
  • उनके वेतन, भत्ते और पेंशन संसद द्वारा निर्धारित किए जाते हैं और भारत की संचित निधि से दिए जाते हैं, जिससे उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।

वर्तमान में, झारखंड उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 25 है, हालांकि कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या भिन्न हो सकती है। यह संरचना राज्य में न्यायपालिका के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करती है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है। JTET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इन संवैधानिक प्रावधानों और प्रक्रियाओं पर अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें ध्यान से पढ़ना महत्वपूर्ण है।

Important Topics Data

पहलू (Aspect)विवरण (Detail)संबंधित अनुच्छेद (Relevant Article)
स्थापना (Establishment)15 नवंबर 2000राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000
स्थान (Location)रांची, झारखंड
संवैधानिक आधार (Constitutional Basis)प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालयअनुच्छेद 214
न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या (Sanctioned Strength of Judges)मुख्य न्यायाधीश सहित 25समय-समय पर राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित
नियुक्ति प्राधिकारी (Appointing Authority)भारत के राष्ट्रपतिअनुच्छेद 217
सेवानिवृत्ति आयु (Retirement Age)62 वर्षअनुच्छेद 217(1)
शपथ ग्रहण (Oath by)राज्य के राज्यपालअनुच्छेद 219

Detailed Notes

झारखंड उच्च न्यायालय न केवल अपनी संरचना के कारण महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके व्यापक कार्य और अधिकार क्षेत्र इसे राज्य की न्यायिक प्रणाली का आधार बनाते हैं। इसके कार्य संविधान द्वारा निर्धारित किए गए हैं और यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने, कानूनों की व्याख्या करने और निचली अदालतों पर नियंत्रण रखने का कार्य करता है। आइए इसकी प्रमुख कार्यप्रणाली को समझते हैं।


झारखंड उच्च न्यायालय के कार्य और अधिकार क्षेत्र (Functions and Jurisdiction of Jharkhand High Court)


1. मूल अधिकारिता (Original Jurisdiction):

कुछ विशेष मामलों में, उच्च न्यायालय सीधे मामलों की सुनवाई कर सकता है। इनमें संसद सदस्यों और राज्य विधानसभा सदस्यों के चुनाव से संबंधित विवाद, राजस्व मामले और मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन से संबंधित मामले शामिल हैं। झारखंड उच्च न्यायालय भी इन मामलों में सीधे हस्तक्षेप कर सकता है।


2. अपीलीय अधिकारिता (Appellate Jurisdiction):

यह उच्च न्यायालय का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। झारखंड उच्च न्यायालय निचली अदालतों (जैसे जिला न्यायालय और सत्र न्यायालय) के दीवानी और आपराधिक दोनों मामलों के निर्णयों के विरुद्ध अपील सुनता है। इसमें जिला न्यायालयों से आने वाली अपीलें और सत्र न्यायालयों द्वारा दिए गए मृत्युदंड के मामलों की पुष्टि भी शामिल है।


3. रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction - Article 226):

संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत, झारखंड उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए और किसी अन्य उद्देश्य के लिए (सामान्य कानूनी अधिकारों के लिए भी) पाँच प्रकार की रिट जारी कर सकता है। ये रिट हैं: बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), प्रतिषेध (Prohibition), उत्प्रेषण (Certiorari) और अधिकार पृच्छा (Quo-Warranto)। सर्वोच्च न्यायालय की तुलना में उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता अधिक व्यापक है क्योंकि यह मौलिक अधिकारों के साथ-साथ सामान्य कानूनी अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।


4. न्यायिक समीक्षा की शक्ति (Power of Judicial Review):

झारखंड उच्च न्यायालय के पास कानूनों और कार्यकारी आदेशों की संवैधानिकता की समीक्षा करने की शक्ति है। यदि कोई कानून या आदेश संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उच्च न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है। यह शक्ति संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 से प्राप्त होती है।


5. अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण (Control over Subordinate Courts - Article 235):

उच्च न्यायालय राज्य के भीतर सभी अधीनस्थ न्यायालयों पर पर्यवेक्षण और नियंत्रण रखता है। इसमें अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदोन्नति, स्थानांतरण और छुट्टी से संबंधित मामले शामिल हैं। यह सुनिश्चित करता है कि निचली अदालतें कुशलतापूर्वक और निष्पक्ष रूप से कार्य करें।


6. अभिलेख न्यायालय (Court of Record - Article 215):

झारखंड उच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय भी है। इसका अर्थ है कि इसके सभी निर्णय और कार्यवाही रिकॉर्ड के रूप में रखी जाती हैं और भविष्य के संदर्भों के लिए एक मिसाल के रूप में कार्य करती हैं। इसके पास अपनी अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति भी है।


JTET परीक्षा के लिए टिप: इन सभी अधिकारों और संबंधित संवैधानिक अनुच्छेदों को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है। अक्सर, सीधे प्रश्न अनुच्छेदों या रिटों के प्रकार पर आधारित होते हैं।

संक्षेप में, झारखंड उच्च न्यायालय राज्य में न्यायपालिका की रीढ़ है, जो कानून के शासन को बनाए रखने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में एक बहुआयामी भूमिका निभाता है। इसकी कार्यप्रणाली को समझना JTET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के सामान्य ज्ञान खंड के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Important Questions & Tips

झारखंड उच्च न्यायालय की संरचना और कार्यप्रणाली को समझना JTET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। यह विषय भारतीय राजव्यवस्था और सामान्य ज्ञान (General Knowledge) का एक अनिवार्य हिस्सा है। यहां कुछ महत्वपूर्ण तैयारी युक्तियाँ और संसाधन दिए गए हैं:


JTET परीक्षा के लिए तैयारी युक्तियाँ (Preparation Tips for JTET Exam)

  • संवैधानिक अनुच्छेद याद करें: अनुच्छेद 214, 215, 216, 226, 227 और 235 जैसे महत्वपूर्ण अनुच्छेदों को कंठस्थ करें। ये सीधे प्रश्न के रूप में आ सकते हैं।
  • रिटों को समझें: पाँच प्रकार की रिट (Habeas Corpus, Mandamus, Prohibition, Certiorari, Quo-Warranto) और उनके विशिष्ट अर्थों एवं उपयोगों को विस्तार से समझें।
  • नियुक्ति प्रक्रिया: न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया, कॉलेजियम प्रणाली और उनकी योग्यताओं पर विशेष ध्यान दें।
  • अधिकार क्षेत्रों का अंतर: मूल, अपीलीय, रिट और पर्यवेक्षी अधिकार क्षेत्रों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।
  • पिछले वर्षों के प्रश्न: झारखंड से संबंधित परीक्षाओं में उच्च न्यायालय से पूछे गए पिछले वर्षों के प्रश्नों का अभ्यास करें। इससे आपको प्रश्नों के पैटर्न और महत्व का अंदाजा होगा।
  • करंट अफेयर्स: यदि झारखंड उच्च न्यायालय से संबंधित कोई महत्वपूर्ण निर्णय या नियुक्ति हुई हो, तो उसे भी ध्यान में रखें।

चेतावनी: केवल सतही ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। अवधारणाओं की गहरी समझ विकसित करें और तथ्यों को सटीकता से याद रखें, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर सूक्ष्म विवरणों पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।

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यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता हमारे लोकतंत्र का आधार है। उच्च न्यायालय इस सिद्धांत को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए, एक जागरूक नागरिक और एक सफल प्रतियोगी छात्र दोनों के रूप में, आपको इन संस्थानों की कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी होनी चाहिए।

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Frequently Asked Questions (JTET EXAM)

झारखंड उच्च न्यायालय में एक मुख्य न्यायाधीश और ऐसे अन्य न्यायाधीश होते हैं जिन्हें भारत के राष्ट्रपति समय-समय पर आवश्यक समझे। इनकी नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 216 के तहत की जाती है। वर्तमान में, इसमें मुख्य न्यायाधीश सहित 25 न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या है, हालांकि कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या भिन्न हो सकती है।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्य के राज्यपाल (मुख्य न्यायाधीश के मामले में) या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से (अन्य न्यायाधीशों के मामले में) की जाती है। योग्यता के लिए, व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए और कम से कम 10 वर्षों तक न्यायिक पद पर रहा हो या किसी उच्च न्यायालय में 10 वर्षों तक अधिवक्ता रहा हो।

झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य कार्यों में मूल अधिकारिता (सीधी सुनवाई), अपीलीय अधिकारिता (निचली अदालतों के फैसलों के खिलाफ अपील), रिट अधिकारिता (अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करना), अधीनस्थ न्यायालयों पर पर्यवेक्षण (अनुच्छेद 227), और न्यायिक समीक्षा की शक्ति शामिल है। यह राज्य में न्याय सुनिश्चित करने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अनुच्छेद 226 के तहत, झारखंड उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए और किसी अन्य उद्देश्य के लिए (सामान्य कानूनी अधिकारों सहित) पाँच प्रकार की रिट जारी कर सकता है। ये रिट बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा हैं। यह शक्ति सर्वोच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता से भी व्यापक है।

झारखंड उच्च न्यायालय भारतीय राजव्यवस्था और सामान्य ज्ञान (GK) खंड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। JTET, JPSC और अन्य राज्य-स्तरीय परीक्षाओं में इसकी संरचना, न्यायाधीशों की नियुक्ति, कार्यकाल, अधिकारिता (विशेषकर रिट अधिकारिता) और संबंधित संवैधानिक अनुच्छेदों पर अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं। इस विषय की गहन समझ आपको इन परीक्षाओं में बेहतर स्कोर करने में मदद करेगी।

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