Understand the Pillars of Governance: Jharkhand State Legislature & Constitution for JTET Social Science Exam. (शासन के स्तंभों को समझें: JTET सामाजिक विज्ञान परीक्षा के लिए झारखंड राज्य विधानमंडल और संविधान)
Practice QuestionsUnictest Team
Updated: 2026-04-22 · English
JTET (झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा) सामाजिक विज्ञान के उम्मीदवारों के लिए, झारखंड राज्य विधानमंडल और संविधान का गहन ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अनुभाग न केवल आपके परीक्षा के अंकों को बढ़ाता है, बल्कि आपको राज्य की प्रशासनिक और संवैधानिक संरचना की गहरी समझ भी प्रदान करता है। Unictest आपके लिए इस महत्वपूर्ण विषय पर एक विस्तृत मार्गदर्शिका लेकर आया है।
The Jharkhand State Legislature and Constitution form a crucial part of the Social Science syllabus for the JTET exam. A thorough understanding of these topics is essential for aspiring teachers to not only score well but also to grasp the foundational administrative and constitutional framework of the state. Let's delve into the intricacies of Jharkhand's governance.
झारखंड राज्य में एक सदनीय (Unicameral) विधानमंडल है, जिसे झारखंड विधान सभा (Jharkhand Vidhan Sabha) के नाम से जाना जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 168 के तहत प्रत्येक राज्य में एक विधानमंडल का प्रावधान है। झारखंड विधान सभा राज्य के लोगों का प्रतिनिधित्व करती है और राज्य के लिए कानून बनाने का कार्य करती है।
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 153 के अनुसार, प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा।
मुख्यमंत्री राज्य सरकार का वास्तविक कार्यकारी प्रमुख होता है। राज्यपाल विधान सभा में बहुमत दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है।
| अनुच्छेद (Article) | विषय (Subject/Provision) | विवरण (Description) |
|---|---|---|
| अनुच्छेद 153 | राज्यों के राज्यपाल (Governors of States) | प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। |
| अनुच्छेद 154 | राज्य की कार्यकारी शक्ति (Executive Power of State) | राज्य की कार्यकारी शक्ति राज्यपाल में निहित होगी। |
| अनुच्छेद 163 | राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद (Council of Ministers to aid and advise Governor) | मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक मंत्रिपरिषद राज्यपाल को सलाह देगी। |
| अनुच्छेद 164 | मंत्रियों के बारे में अन्य प्रावधान (Other provisions as to Ministers) | मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाएगी। |
| अनुच्छेद 168 | राज्यों में विधानमंडलों का गठन (Constitution of Legislatures in States) | प्रत्येक राज्य के लिए एक विधानमंडल होगा (विधानसभा और/या विधान परिषद)। |
| अनुच्छेद 170 | विधान सभाओं की संरचना (Composition of the Legislative Assemblies) | विधान सभाओं की अधिकतम और न्यूनतम सदस्य संख्या का प्रावधान। |
| अनुच्छेद 243K | पंचायतों के चुनाव (Elections to the Panchayats) | राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पंचायतों के चुनाव का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण। |
झारखंड विधान सभा के पास राज्य सूची और समवर्ती सूची में उल्लिखित विषयों पर कानून बनाने की शक्ति है। इसके प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:
भारतीय संविधान के 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों ने देश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था (Three-tier Panchayati Raj System) को अनिवार्य कर दिया। झारखंड में भी यह प्रणाली लागू है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना है।
इन संस्थाओं का मुख्य कार्य स्थानीय विकास, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाएं प्रदान करना और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। JTET सामाजिक विज्ञान के लिए, आपको इन संस्थाओं की संरचना, कार्य और उनके संवैधानिक प्रावधानों को समझना होगा।
इस खंड की तैयारी के लिए, आपको संविधान के उन अनुच्छेदों पर विशेष ध्यान देना चाहिए जो राज्य सरकार से संबंधित हैं। झारखंड के गठन के बाद से राज्य की राजनीति और प्रशासन में हुए प्रमुख बदलावों पर भी नजर रखनी चाहिए।
JTET सामाजिक विज्ञान परीक्षा में इस खंड से तथ्यात्मक और अवधारणात्मक दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जा सकते हैं। अपनी तैयारी को प्रभावी बनाने के लिए इन रणनीतियों का पालन करें:
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